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Russia-China relations: रूस और चीन में बढ़ती निकटता से अमेरिका में बढ़ रही है चिंता

Wed, 22 Feb 2023 07:23 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

Russia-China relations: रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने मास्को में अपने बहुचर्चित स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में यूक्रेन युद्ध को रूस के अस्तित्व से जुड़ा संघर्ष बताया। उन्होंने कहा कि रूस के पास अंत तक यह युद्ध लड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं है...
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Russia-China relations - फोटो : Agency (File Photo)
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यूक्रेन युद्ध शुरू होने की पहली बरसी पर यह साफ संकेत मिला है कि अमेरिका के सामने रूस और चीन दोनों का एक साथ मुकाबला करने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने युद्ध की पहली बरसी से ठीक पहले यूक्रेन की राजधानी कीव की यात्रा की और मंगलवार को उन्होंने पोलैंड में एक महत्त्वपूर्ण भाषण दिया। इसमें उन्होंने एलान किया कि जब तक भी जरूरत होगी, अमेरिका यूक्रेन के पक्ष में खड़ा रहेगा।

उधर मंगलवार को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने मास्को में अपने बहुचर्चित स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में यूक्रेन युद्ध को रूस के अस्तित्व से जुड़ा संघर्ष बताया। उन्होंने कहा कि रूस के पास अंत तक यह युद्ध लड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। विश्लेषकों के मुताबिक रूस और पश्चिमी देशों में जारी इस टकराव के बीच चीन अपनी रणनीतिक चालें चल रहा है। चीन के विदेश नीति सबंधी प्रमुख वांग यी मंगलवार को मास्को पहुंचे, जहां उनके पुतिन से भी मिलने की संभावना है।

इन घटनाक्रमों का विश्लेषण करते हुए टीवी चैनल सीएनएन के टीकाकार स्टीफन कॉलिसन ने कहा है कि इस वक्त अमेरिका को लगातार बिगड़ रहे विदेश नीति संबंधी संकट से उलझना पड़ रहा है। उसके सामने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी रूस के साथ-साथ नई महाशक्ति के रूप में उभरे चीन का सामना करने की भी चुनौती आ खड़ी हुई है। ये दोनों देश खुलेआम अमेरिकी वर्चस्व को और उन नियमों को चुनौती दे रहे हैं, जिनसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था दशकों से संचालित हो रही थी।  

विश्लेषकों के मुताबिक विदेश नीति संबंधी नई और जटिल स्थिति से चुनौती सिर्फ बाइडन प्रशासन की कूटनीति के सामने ही पेश नहीं आई है। बल्कि इससे सुरक्षा संबंधी और राजनीतिक चुनौतियां भी खड़ी हुई हैं। यूक्रेन को लगातार हथियार भेजने का नतीजा पश्चिमी देशों के अपने भंडार में हथियारों की कमी के रूप में सामने आ रही है। उधर अमेरिका में विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने यह कहते हुए राष्ट्रपति बाइडन की आलोचना तेज कर दी है कि अपने देशवासियों की आर्थिक और अन्य समस्याओं की उपेक्षा कर उन्होंने यूक्रेन को अपनी प्राथमिकता बना रखा है।

इस सोमवार को फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डिसैंटिस ने एलान किया कि अगर वे 2024 में राष्ट्रपति चुने गए, तो यूक्रेन उनकी प्राथमिकता नहीं रहेगा। डिसैंटिस को रिपब्लिकन पार्टी का उभरता सितारा माना जा रहा है। उनके पहले हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी के नेता केविन मैकार्थी इस पर एतराज जता चुके हैं कि बाइडन ने यूक्रेन को ‘ब्लैंक चेक’ सौंप रखा है। अमेरिकी टीकाकारों के मुताबिक पुतिन की नजर अमेरिका में विपक्ष की तरफ से जो बाइडन के बढ़ रहे विरोध पर है।

पुतिन ने मंगलवार को न्यू स्टार्ट परमाणु संधि में अपने देश की भागीदारी निलंबित करने की घोषणा की। इसके साथ ही अमेरिका और रूस के बीच हथियार नियंत्रण संबंधी सभी करार टूट गए हैं। अमेरिकी विश्लेषकों ने इस ओर भी ध्यान खींचा है कि रूस को हथियार ना देने संबंधी दी गई चेतावनी का चीन पर कोई असर नहीं हुआ है। उलटे चीन ने अमेरिका के खिलाफ रूस के साथ मिल कर साझा मोर्चा खोलने की तैयारी में नई ताकत झोंक दी है।

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