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Russia-China relations: साल भर में कहां से कहां पहुंच गए रूस और चीन के संबंध!

Sat, 04 Feb 2023 02:34 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

Russia-China relations: विश्लेषकों के मुताबिक चीन ने भले यूक्रेन युद्ध में रूस को सैनिक मदद न दी हो, लेकिन इस बीच रूस के साथ चीनी सैनिकों ने कई बार साझा सैनिक अभ्यास किए हैं। इनमें एक अभ्यास पूर्वी चीन सागर में किया गया, जिसमें रूसी लड़ाकू जहाज जापान की सीमा के करीब तक गए...
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Russia-China relations: व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पिछले साल चार फरवरी को ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने अपना बहुचर्चित साझा वक्तव्य जारी किया था। उस समय पुतिन बीजिंग विंटर ओलिंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए यहां आए थे। शी और पुतिन ने उस साझा वक्तव्य विश्व व्यवस्था पर पश्चिम के दबदबे को खत्म करने का संकल्प लिया था। इसके ठीक 20 दिन बाद रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अपनी विशेष सैनिक कार्रवाई शुरू की। इस बीच बीते एक साल में चीन और रूस के संबंध लगातार मजबूत होते गए हैं।

यह अवधि चीन के लिए फायदेमंद साबित हुई है। रूस उसके लिए कच्चे तेल का एक बड़ा सप्लायर बन कर उभरा है। आम धारणा है कि रूस ने चीन को अंतरराष्ट्रीय भाव की तुलना में काफी कम दाम पर तेल बेचा है। यह मसला अमेरिका से चीन के संबंधों में एक और पेच बन गया है। यूक्रेन युद्ध के आरंभिक दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन को रूस का साथ ना देने की चेतावनी दी थी। लेकिन चीन ने उस पर ध्यान नहीं दिया।

अमेरिका में इस बात के कयास लगाए जाते रहे हैं कि क्या चीन ने रूस को सैनिक मदद भी दी है। अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने कहा है कि उनके पास ऐसे कोई सबूत नहीं है। चीन ने भी रूस को हथियार देने का बार-बार खंडन किया है। लेकिन आर्थिक क्षेत्र में वह रूस से अपने संबंध को लगातार मजबूत बनाता चला गया है।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के बीच बढ़े व्यापार को लेकर रूसी राष्ट्रपति को बधाई संदेश भेजा था। रूस और चीन के बीच गहराते इस संबंध से पश्चिमी राजधानियों में बेचैनी देखी गई है। वहां यह आम शिकायत जताई गई है कि रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों को नाकाम करने में सबसे बड़ी भूमिका चीन ने निभाई है।

विश्लेषकों के मुताबिक चीन ने भले यूक्रेन युद्ध में रूस को सैनिक मदद न दी हो, लेकिन इस बीच रूस के साथ चीनी सैनिकों ने कई बार साझा सैनिक अभ्यास किए हैं। इनमें एक अभ्यास पूर्वी चीन सागर में किया गया, जिसमें रूसी लड़ाकू जहाज जापान की सीमा के करीब तक गए। जापान अमेरिका का खास सहयोगी देश है और वहां अमेरिकी सैनिक अड्डे मौजूद हैं।

इसी हफ्ते जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने टोक्यो यात्रा पर आए नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग से बातचीत में रूस और चीन के बीच बढ़ रहे सैनिक सहयोग को लेकर चिंता जताई। हांगकांग बैपटिस्ट यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ प्रो. ज्यां-पियरे केबेस्तां ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘चीन और रूस के बीच प्रगाढ़ हुए व्यापार और राजनयिक संबंधों से पश्चिम में चिंता बढ़ी है। रूस से दोस्ती का अभी चीन की विदेश नीति में केंद्रीय स्थान है। रूस ने संयुक्त राष्ट्र में चीन का प्रभाव बढ़ाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।’

वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक स्टिम्पसन सेंटर में चाइना प्रोग्राम के निदेशक युन सुन ने कहा है- ‘अर्थव्यवस्था की बिगड़ी स्थिति को सुधारने की कोशिश में भी चीन ने रूस को खास प्राथमिकता दी है।’

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