Cancer Vaccine: क्या रूस ने बना लिया कैंसर का 100% असरदार टीका; यह काम कैसे करेगा, कब तक आएगा बाजार में?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 09 Sep 2025 01:54 PM IST
सार
जिस कैंसर वैक्सीन का ट्रायल हुआ है, वह काम कैसे करती है? रूस की तरफ से बनाई गई वैक्सीन का ट्रायल कैसे हुआ और इससे क्या जानकारी सामने आई? इस वैक्सीन को लेकर क्या शंकाएं हैं? साथ ही यह कब तक बाजार में आ सकती है? इसके अलावा क्या दुनिया में कहीं और कैंसर वैक्सीन पर काम चल रहा है? आइये जानते हैं...
कैंसर! कभी लाइलाज मानी जाने वाली इस समस्या के इलाज के लिए बीते दशकों में कई नई तकनीकें और तरीके सामने आए हैं। हालांकि, अभी भी कैंसर खत्म करने के लिए कोई सधी हुई दवा का आविष्कार नहीं हुआ है। हालांकि, अब रूस की तरफ से इस मामले में खुशखबरी आ सकती है। दरअसल, दावा किया गया है कि रूस में कैंसर की एक वैक्सीन का ट्रायल किया गया था, जिसकी एफिकेसी यानी प्रभावशीलता 100 फीसदी रही है। सीधे शब्दों में समझें तो जितने भी लोगों को यह टीका दिया गया, उनके शरीर में कैंसर के खिलाफ लड़ने की क्षमता पैदा हो गई।
रूस से आई इस खबर ने कैंसर की वैक्सीन को लेकर पूरी दुनिया में हलचल पैदा कर दी है। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह वैक्सीन काम कैसे करती है? रूस की तरफ से बनाई गई वैक्सीन का ट्रायल कैसे हुआ और इससे क्या जानकारी सामने आई? इस वैक्सीन को लेकर क्या शंकाएं हैं? साथ ही यह कब तक बाजार में आ सकती है? इसके अलावा क्या दुनिया में कहीं और कैंसर वैक्सीन पर काम चल रहा है? आइये जानते हैं...
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रूस में कैंसर वैक्सीन का ट्रायल सफल।
- फोटो : अमर उजाला
कैंसर! कभी लाइलाज मानी जाने वाली इस समस्या के इलाज के लिए बीते दशकों में कई नई तकनीकें और तरीके सामने आए हैं। हालांकि, अभी भी कैंसर खत्म करने के लिए कोई सधी हुई दवा का आविष्कार नहीं हुआ है। हालांकि, अब रूस की तरफ से इस मामले में खुशखबरी आ सकती है। दरअसल, दावा किया गया है कि रूस में कैंसर की एक वैक्सीन का ट्रायल किया गया था, जिसकी एफिकेसी यानी प्रभावशीलता 100 फीसदी रही है। सीधे शब्दों में समझें तो जितने भी लोगों को यह टीका दिया गया, उनके शरीर में कैंसर के खिलाफ लड़ने की क्षमता पैदा हो गई।
रूस से आई इस खबर ने कैंसर की वैक्सीन को लेकर पूरी दुनिया में हलचल पैदा कर दी है। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह वैक्सीन काम कैसे करती है? रूस की तरफ से बनाई गई वैक्सीन का ट्रायल कैसे हुआ और इससे क्या जानकारी सामने आई? इस वैक्सीन को लेकर क्या शंकाएं हैं? साथ ही यह कब तक बाजार में आ सकती है? इसके अलावा क्या दुनिया में कहीं और कैंसर वैक्सीन पर काम चल रहा है? आइये जानते हैं...
पहले जानें- दुनिया में कितना बड़ा खतरा बन चुका है कैंसर?
दुनियाभर में कैंसर के मामलों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। आंकड़ों की मानें तो कैंसर वैश्विक स्तर पर दुनिया में सबसे ज्यादा मौतों का कारण बनता है। 2022 के सबसे स्पष्ट कैंसर मौतों के डाटा को देखा जाए तो दुनिया में उस साल 97 लाख लोगों की जान चली गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, कैंसर से मौतों की गति इस तेजी से बढ़ रही है कि 2050 तक ही इसका का बोझ 77 फीसदी तक बढ़कर हर साल 1 करोड़ 82 लाख मौतों का आंकड़ा पार कर सकता है।
रूस की कैंसर वैक्सीन को लेकर क्या जानकारी सामने आई?
रूस की संघीय चिकित्सा और जैविक एजेंसी (एफएमबीए) की प्रमुख वेरोनिका स्कवोर्तसोवा ने वैक्सीन के परीक्षण और इसकी प्रभावशीलता को लेकर ईस्टर इकोनॉमिक फोरम में जानकारी सामने रखी। उन्होंने कहा कि इस टीके को परीक्षण के बाद रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। ऐसे में अगर इस टीके को आगे के परीक्षणों के लिए मंजूरी मिल जाती है और वहां यह इसी तरह के नतीजे दिखाने में सफल रहती है तो कैंसर के उपचार का तरीका बदलने वाला है।
अब जानें- कैसे काम करती है कैंसर की यह वैक्सीन?
रूस की नई कैंसर वैक्सीन- एंटेरोमिक्स को एमआरएनए (mRNA) तकनीक पर बनाया गया है। कुछ समय पहले अमेरिका में भी इसी तरह कोरोनावायरस के टीकों को बनाया गया था।
एमआरएनए तकनीक से बने टीके पारंपरिक टीकों से काफी अलग होते हैं। इनमें इंसानी शरीर में मौजूद प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) को सक्रिय करने के लिए असक्रिय या कमजोर वायरस का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इससे उलट इन वैक्सीन में वायरस के बाहरी आवरण में मौजूद स्पाइक प्रोटीन्स का इस्तेमाल किया जाता है। यानी वायरस का एक छोटा सा हिस्सा भेजकर प्रतिरक्षा तंत्र को खास तौर पर अनुवांशिक निर्देश भेजे जाते हैं। इससे प्रतिरक्षा तंत्र पूरे वायरस की जगह उस खास तरह के एंटीजन (स्पाइक प्रोटीन) को खतरा समझता है और उसके खिलाफ एंटीजन बनाता है। एक बार जब शरीर का इम्यून सिस्टम एंटीजन की पहचान कर लेता है तो आगे उसके खिलाफ आसानी से एंटीबॉडीज बना लेता है और शरीर को खतरा पहुंचाने वाले वायरस को नष्ट कर देता है।
कैंसर के इलाज की बात करें तो इंसानी शरीर में ट्यूमर की कोशिकाएं जब फैलती हैं तो इनके ऊपर एंटीजन आ जाते हैं। मौजूदा समय में कैंसर के इलाज के लिए इन एंटीजन को खत्म करने के लिए कीमोथैरेपी का इस्तेमाल किया जाता है, जो कि रेडिएशन की तीव्रता की वजह से न सिर्फ कैंसर की कोशिकाओं को, बल्कि स्वस्थ कोशिकाओं को भी नष्ट कर देता है। इससे इंसानों को न सिर्फ कमजोरी महसूस होती है, बल्कि कई बार कैंसर का इलाज आगे बढ़ाना भी मुश्किल हो जाता है।
दूसरी तरफ एमआरएनए वैक्सीन के जरिए प्रतिरक्षा तंत्र को इस तरह से प्रशिक्षित कर दिया जाता है कि अगर कैंसर से जुड़ा ट्यूमर बढ़ रहा हो तो उसे खत्म करने लायक एंटीबॉडीज शरीर में बन जाएं और कैंसरकारक कोशिकाओं को नष्ट कर दें। वह भी बिना स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाएं।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जहां दुनियाभर की अलग-अलग वैक्सीन स्वस्थ लोगों को आगे किसी बीमारी से बचाने के लिए दी जाती हैं तो वहीं एमआरएनए तकनीक से बनी कैंसर वैक्सीन उन लोगों को भी दी जा सकेगी, जो पहले ही कैंसर से जूझ रहे हैं। एक और खास बात यह है कि कैंसर वैक्सीन को मरीजों की जरूरत के हिसाब से भी बनाया जा सकता है। यानी कि ट्यूमर होने वाली जगह और उसकी स्टेज के हिसाब से। इसकी वजह यह है कि कैंसर शरीर के किसी एक अंग में नहीं होता। अलग-अलग अंगों में यह शरीर को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है। ऐसे में टीके को उस खास ट्यूमर और उसके प्रभाव क्षेत्र के हिसाब से भी तैयार किया जा सकता है।
कैंसर वैक्सीन के कितनी प्रभावी होने का दावा?
रूसी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक, इस वैक्सीन के ट्रायल में 48 लोग शामिल हुए। इसे रूस के नेशनल मेडिकल रिसर्च एंड रेडियोलॉजिकल सेंटर और एंगेलहार्ट इंस्टीट्यूट ऑफ मॉलिक्युलर बायोलॉजी की तरफ से किया गया। जहां पहले फेज के ट्रायल काफी भरोसा देने वाले साबित हुए हैं, वहीं अभी वैक्सीन के फेज-2 और फेज-3 के ट्रायल किए जाने हैं, जो कि एक बड़े संख्याबल पर होगा। यानी मरीज अलग-अलग होंगे और उनकी शारीरिक क्षमताएं, ब्लड ग्रुप, बीमारी की स्टेज और अन्य मानक भी अलग होंगे।
वैरोनिका स्क्वोर्तसोवा ने बताया है कि कैंसर वैक्सीन को कई वर्षों की रिसर्च के आधार पर तैयार किया गया है। तीन साल तक इसकी अनिवार्य प्री-क्लिनिकल टेस्टिंग भी की गई। इसके नतीजे काफी आशाजनक पाए गए हैं। ट्रायल्स में सामने आया है कि वैक्सीन बार-बार दिए जाने के बाद भी शरीर के लिए सुरक्षित है। कुछ कैंसर के मामलों में तो वैक्सीन 60 से 80 फीसदी तक ट्यूमर को खत्म कर देती है या इसकी बढ़ोतरी रोक देती है। इतना ही नहीं रिसर्चर्स ने मरीजों की जान बचने की दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की।
कब तक बाजार में आ सकता है यह टीका, क्या हो सकती है कीमत?
बताया गया है कि ट्रायल में टीके को एक खास तरह के कैंसर- कोलोरेक्टल कैंसर के इलाज तक सीमित रखा गया है। यह बड़ी आंत का कैंसर होता है। हालांकि, रिसर्च में बाकी तरह के कैंसर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इनमें आक्रामक माने जाने वाले ब्रेन ट्यूमर को भी शामिल किया गया है। अगर आगे कुछ फेज के ट्रायल सफल रहते हैं तो इस वैक्सीन को अन्य तरह के कैंसर पर भी टेस्ट किया जाएगा।
रिपोर्ट्स की मानें तो रूस की कैंसर वैक्सीन की कीमत तीन लाख रूबल्स तक हो सकती है। भारतीय मुद्रा में यह राशि 2 लाख 50 हजार रुपये के करीब होगी। यानी आम लोगों और मरीजों को कैंसर से बचाव का एक अहम साधन मिल सकता है।
क्या और देशों में भी चल रहा कैंसर वैक्सीन का टेस्ट?
रूस अकेला देश नहीं है, जहां कैंसर के टीके के ट्रायल्स जारी हैं। दुनियाभर में बायोटेक कंपनियां ऐसी ही कोशिशों में जुटी हैं। जर्मनी में बायोएनटेक, अमेरिका में मॉडर्ना और क्यूरवैक जैसी कंपनियां एमआरएनए वैक्सीन का ट्रायल कर रही हैं। यह कंपनियां पैनक्रियाटिक कैंसर के साथ फेफड़ों के कैंसर और स्किन कैंसर की वैक्सीन पर काम कर रही हैं। इनमें कई कंपनियां तो दूसरे और तीसरे फेज के ट्रायल तक पहुंच चुकी हैं। फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में फिलहाल दो कैंसर वैक्सीन ट्रायल में हैं और 2026 के अंत तक नियामक के पास मंजूरी के लिए जा सकती हैं।
दूसरी तरफ ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ने भी दुनिया का सबसे बड़ा पहले फेज का ट्रायल शुरू हुआ। है। 2030 तक एनएचएस ने हजारों मरीजों के इलाज का लक्ष्य रखा है।