यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों से जारी टकराव के बीच रूस ने ग्रीनलैंड, ईरान, अमेरिका और नाटो पर एक के बाद एक सख्त बयान देकर वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड में रूस या चीन के दखल का आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर लगातार आक्रामक बयान दे रहे हैं और यूरोपीय देशों पर दबाव बना रहे हैं।
लावरोव ने भारत-चीन से रिश्तों की सराहना की
रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने भारत और चीन के साथ रूस के रिश्तों को खास बताते हुए कहा है कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था अब स्थायी सच्चाई बन चुकी है। मॉस्को में अपनी वार्षिक प्रेस वार्ता के दौरान लावरोव ने कहा कि नई वैश्विक व्यवस्था में कई शक्ति केंद्र उभर चुके हैं और दुनिया को अब एकध्रुवीय या द्विध्रुवीय ढांचे में नहीं बांधा जा सकता। उन्होंने भारत के साथ रूस की रणनीतिक साझेदारी को विशेष और भरोसेमंद करार दिया और याद दिलाया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले साल दिसंबर में भारत का दौरा किया था। इस दौरान भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए पांच साल का रोडमैप तय किया गया था।
लावरोव ने चीन के साथ रूस के संबंधों को भी अभूतपूर्व बताया और कहा कि यूरेशिया और वैश्विक मंच पर दोनों देशों के विचारों में गहरी समानता है। उन्होंने भारत, रूस और चीन के त्रिपक्षीय मंच आरआईसी को फिर से सक्रिय करने की वकालत की, जो 2020 के गलवान घाटी तनाव के बाद ठप पड़ गया था। लावरोव के मुताबिक आरआईसी, ब्रिक्स की नींव है और बहुध्रुवीय विश्व का अहम आधार भी। उन्होंने कहा कि चीन, भारत और ब्राजील नए आर्थिक शक्ति केंद्र बनकर उभरे हैं, जबकि अफ्रीका भी तेजी से एक नए केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा है।
पश्चिम के लिए क्या संकेत हैं?
रूस के इन बयानों को पश्चिमी देशों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। यूक्रेन युद्ध के चलते पहले से तनावपूर्ण रिश्तों के बीच ग्रीनलैंड, ईरान और नाटो जैसे मुद्दों पर रूस का यह आक्रामक रुख संकेत देता है कि आने वाले दिनों में वैश्विक भू-राजनीति और ज्यादा टकराव की ओर बढ़ सकती है। ट्रंप की टैरिफ नीति और रूस के पलटवार से यूरोप, अमेरिका और रूस के संबंध और जटिल होने के आसार हैं।