रूस से अनाज भरा एक जहाज पहुंचने से बांग्लादेश ने राहत की सांस ली है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस और यूक्रेन से यहां अनाज का आना रुका हुआ था। लगभग पांच महीनों के बाद रूस से अनाज भरा एक जहाज सोमवार को बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह पर पहुंचा। हाल में तुर्किये की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच अनाज निर्यात फिर से शुरू करने पर सहमति बनी थी। जानकारों के मुताबिक इससे बांग्लादेश जैसे बहुत से देशों को बहुत राहत मिली है, जो अनाज के लिए काफी हद तक इन दोनों युद्धरत देशों पर निर्भर रहे हैं।
बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय में वरिष्ठ सचिव तपन कांति घोष ने उम्मीद जताई है कि रूस से आयात-निर्यात अब सामान्य हो जाएगा। बांग्लादेश सरकार ने अब वहां से गेहूं मंगाने के लिए औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। घोष ने उम्मीद जताई कि अब दोनों देशों के बीच निजी व्यापार भी सामान्य हो जाएगा। लेकिन इस रास्ते में भुगतान का तरीका एक बड़ी समस्या है।
यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों ने भुगतान के अंतरराष्ट्रीय सिस्टम स्विफ्ट से रूस को निकाल दिया था। इसलिए अब दोनों देशों को भुगतान का नया रास्ता ढूंढने की कोशिश करनी पड़ रही है। यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत और चीन जैसे देशों ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया। इसके लिए भुगतान की उन्होंने वैकल्पिक प्रणाली बनाई। अब बांग्लादेश भी वैसा करने की कोशिश में है।
अनाज आयात से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक रूस और बांग्लादेश के बीच मुद्रा विनिमय संबंधी मसला अभी कायम है। अगर इसका समाधान हो जाए, तो रूस से अनाज आयात करना आसान हो जाएगा। बांग्लादेश के खाद्य मंत्री साधन चंद्र मजूमदार ने कहा है- ‘पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों में खाद्य पदार्थ शामिल नहीं हैं। लेकिन इन चीजों को मंगाना कितना आसान है, यह तभी पता चलेगा, जब भुगतान की शुरुआत होगी।’
पहले रूस और यूक्रेन से बांग्लादेश कपास, गेहूं, मक्का, सरसों और दालों का आयात करता था। देश में हर साल 70 लाख टन गेहूं की खपत होती है। उसका आधा हिस्सा सिर्फ इन्हीं दो देशों से आता था। बांग्लादेश के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि ये आयात रुकने से देश में खाद्य संकट का जो अंदेशा पैदा हुआ था, उसमें अब राहत मिल सकती है।
सोमवार को आए कार्गो के जरिए रूस से 3,328 टन मशीनरी का भी आयात हुआ है। इस मशीनरी का उपयोग रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में होगा। विश्लेषकों के मुताबिक मशीनरी के आयात से पश्चिमी देशों के साथ बांग्लादेश के संबंध में पेच आ सकता है। मशीनरी उन जरूरी चीजों में नहीं है, जिसे पश्चिमी प्रतिबंधों से छूट मिली हुई हो।
मगर मोंगला बंदरगाह के अधिकारियों ने कहा- ‘युद्ध रूस का आंतरिक मामला है। बांग्लादेश में सभी बड़ी परियोजनाओं के लिए मशीनरी विदेश से ही मंगवाई जाती है। नियमों के तहत ही रूस से आयात किया गया है। कुछ समय के ठहराव के बाद अब ऐसे उत्पाद नियमित रूप से आएंगे।’