अमेरिका और रूस के बीच एक और मोर्चा खुल गया है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी- इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेन यूनियन (आईटीयू) के प्रमुख पद पर अपने उम्मीदवार को बैठाने के लिए दोनों देशों ने मुहिम तेज कर दी है। इस पद के लिए होने वाले चुनाव से तय होगा कि इंटरनेट के संचालन में दोनों में से किस देश का ज्यादा दखल होगा।
अमेरिका ने आईटीयू के प्रमुख पद के लिए डोरीन बोगडम-मार्टिन को अपना उम्मीदवार बनाया है। अगर विजयी रहीं, तो वे आईटीयू की पहली महिला प्रमुख होंगी। उनका मुकाबला रूस के राशिद इस्माइलोव से है। इस्माइलोव कई बड़ी संचार कंपनियों के लिए काम कर चुके हैं। उनमें नोकिया, इरिक्सन और हुवावे भी हैं।
अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन की अध्यक्ष जेसिका रोजेवर्सेल बॉडगम-मार्टिन के पक्ष में जोरदार प्रचार अभियान में जुटी हुई हैं। इस सिलसिले में उन्होंने इस हफ्ते यूरोप का दौरा किया। इसके अलावा वे एशिया और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधियों से भी लगातार मिल रही हैं। विश्लेषकों ने कहा है कि आईटीयू की क्या भूमिका होनी चाहिए, इसे लेकर दुनिया में एक खास तरह का टकराव चल रहा है। चीन और रूस की दलील है कि इंटरनेट स्टैंडर्ड और प्रोटोकॉल तय करने का अधिकार सरकारों के पास होना चाहिए। जबकि पश्चिमी देश चाहते हैं कि ये अधिकार निजी क्षेत्र के पास बना रहे।
आईटीयू के प्रमुख पद का चुनाव गुप्त मतदान के जरिए होगा। उसमें संयुक्त राष्ट्र के सदस्य सभी 193 देशों को वोट डालने का अधिकार होगा। ये चुनाव इस साल सर्दियों में बुखारेस्ट में आईटीओ के होने वाले सम्मेलन के दौरान होगा। अमेरिका बडगम-मार्टिन के पक्ष में यह दलील दे रहा है कि वे तकरीबन 30 साल से आईटीयू में काम कर रही हैं। इसलिए वे इसके प्रमुख का रोल निभाने के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैँ।