बता दें कि अमेरिका ने पिछले महीने मध्यम दूरी की खतरनाक मिसाइलों का परीक्षण रोकने के लिए की गई 30 साल पुरानी इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस (आईएनएफ) संधि से खुद को अलग कर लिया था। संधि से अलग होने के एक सप्ताह बाद ही 20 अगस्त को अमेरिका ने 500 किलोमीटर से अधिक रेंज वाली एक क्रूज मिसाइल का परीक्षण कर रूस को नाराज कर दिया था।
रूस ने उसी समय कहा था कि अमेरिका की तरफ से समझौते का उल्लंघन किए जाने के कारण अब वह भी मिसाइल परीक्षण शुरू करेगा। इसके चलते दोनों देशों के बीच बेहद तनाव का माहौल बना हुआ है।
आईएनएफ संधि भले ही दुनिया की दो महाशक्तियों रूस और अमेरिका के बीच थीं, लेकिन अब तक इसका हवाला देकर अन्य देशों के मिसाइल परीक्षणों को भी सीमित रखा गया था। ऐसे में इन दोनों देशों के इस संधि से हटने का असर उन देशों पर भी दिखाई देगा, जो अभी तक चुपके-चुपके अपनी मिसाइल क्षमता बढ़ा रहे थे।
ये देश अब खुलकर मिसाइल परीक्षण करते दिखाई देंगे। खासतौर पर चीन इनमें अग्रणी है, जिसके बारे में पिछले साल अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उसकी बनाई 95 फीसदी मिसाइलें आईएनएफ संधि का उल्लंघन करती हैं। चीन के मिसाइल परीक्षणों का दायरा बढ़ाने पर भारत को भी इस होड़ में कूदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।