स्थानीय चुनावों के लिए सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस ने अपनी गठबंधन नीति का एलान कर दिया है। इसे सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के लिए तगड़ा झटका समझा गया है। नेपाली कांग्रेस ने फैसला किया है कि 13 मई को होने वाले स्थानीय चुनावों में गठबंधन करने का फैसला पार्टी की स्थानीय इकाइयां वहां की स्थिति और जरूरत के मुताबिक करेंगी। यानी पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर कोई गठबंधन न करने का फैसला किया है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नेपाली कांग्रेस में देउबा विरोधी नेता शेखर कोइराला और गगन थापा चुनावी गठबंधन के खिलाफ रहे हैं। थापा पार्टी के महासचिव भी हैं। विश्लेषकों का कहना है कि देउबा की बड़ी चिंता अपनी सरकार की स्थिरता रही है। वे नहीं चाहते कि पांच दलों के सत्ताधारी गठबंधन में कोई फूट पड़े। लेकिन अब नेपाली कांग्रेस को संघीय सरकार में अपने सहयोगी दलों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरना पड़ेगा।
अब माओइस्ट सेंटर पार्टी के विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) से गठबंधन कर लेने की संभावना भी बढ़ गई है। ऐसा होने पर नेपाली कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ जाएगी। 2017 के स्थानीय चुनावों में यूएमएल को 45.21 फीसदी सीटें मिली थीं। उसे 36.82 फीसदी वोट मिले थे। सीट और वोट प्रतिशत दोनों लिहाज से यूएमएल सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी थी। आज भी उसके जनाधार को मजबूत समझा जाता है।
नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने कहा है कि अब पार्टी की स्थानीय इकाइयां जल्द ही अपने स्तर पर संभावित गठबंधनों को अंतिम रूप देंगी। इस बारे में फैसला करने के लिए प्रांत, जिला और स्थानीय स्तरों पर पार्टी की विशेष कमेटियां बनाई जाएंगी। पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति के एक सदस्य ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘देउबा के राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन चाहने के कई कारण थे। इनमें एक यह भी है कि वे माओइस्ट सेंटर पार्टी को इनाम देना चाहते थे, जिसने अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से 50 करोड़ डॉलर की मदद लेने के लिए हुए करार का संसदीय अनुमोदन कराने में उनकी मदद की थी।’