‘पार्टीगेट’ स्कैंडल में ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के खिलाफ तीसरी जांच शुरू होने से सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी का संकट और बढ़ गया है। इस बीच ये सवाल भी उठाए गए हैं कि क्या जॉनसन के सत्ता में रहते निष्पक्ष जांच हो पाएगी।
जॉनसन पर आरोप है कि 2020 में जब पूरे देश में कोरोना महामारी के कारण सख्त लॉकडाउन लागू था, तब उन्होंने सरकारी नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रधानमंत्री निवास-10, डाउनिंग स्ट्रीट में पार्टियां आयोजित कीं। उन पार्टियों में जश्न का माहौल रहा। इसी मामले में जॉनसन के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारी सू ग्रे जांच कर चुके हैं। उनकी पूरी रिपोर्ट अभी जारी नहीं हुई है। उधर ब्रिटेन की खुफिया पुलिस स्कॉटलैंड यार्ड भी इस मामले की जांच कर रहा है। इस मामले में जॉनसन को जुर्माना देने के लिए एक नोटिस प्राप्त हो चुका है।
तीसरी जांच का एलान होने के बाद कंजरवेटिव पार्टी के वरिष्ठ सांसद टॉबियस एलवुड ने कहा कि ब्रिटिश जनता के भरोसे पर गहरी चोट पहुंचाई गई है। उन्होंने कंजरवेटिव सांसदों का आह्वान किया है कि वे जॉनसन को हटा कर नया नेता चुन लें। उधर पार्टी नेताओं की तरफ से दिए जा रहे ऐसे बयानों को बेवफाई बताते हुए उत्तरी आयरलैंड मामलों के मंत्री कॉनोर बर्न्स बीबीसी के एक कार्यक्रम में कहा- ये लोग जॉनसन की आलोचना का करने का बहाना ढूंढते रहे हैं। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री को संसद में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक एलवुड जॉनसन विरोधी खेमे का नेतृत्व कर रहे हैँ। वे पहले मंत्री रह चुके हैं। साथ ही वे हाउस ऑफ कॉमंस की रक्षा मामलों की समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने स्काई टीवी के एक कार्यक्रम में कहा- ‘अब उचित यह होगा कि कंजरवेटिव सांसद मामले को अपने हाथ में लें। मेरी समझ में ऐसा ही होगा, क्योंकि अभी और बुरी खबरें आने वाली हैं।’