संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सोमवार को आयोजित "संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की रक्षा के माध्यम से प्रभावी बहुपक्षवाद" पर खुली बहस में संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा कांबोज ने हिस्सा लिया। रुचिरा कंबोज ने पूछा कि क्या 'प्रभावी बहुपक्षवाद' को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की रक्षा का बचाव करके अमल में लाया जा सकता है, जो पांच देशों को दूसरों की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनाता है और उन पांचों में से प्रत्येक को शेष 188 सदस्य देशों की सामूहिक इच्छा को अनदेखा करने की शक्ति प्रदान करता है।
जयशंकर के बयान को दोहराया
कंबोज ने कहा कि पिछले साल सितंबर में यूएनजीए ने 70 से अधिक वैश्विक नेताओं से सुधारों के लिए एक समान आह्वान सुना। जैसा कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 दिसंबर 2022 को इस परिषद की खुली बहस में कहा था और आज मैं उसे उद्धृत करती हूं, "हमारा साझा एजेंडा और भविष्य का शिखर सम्मेलन तभी परिणाम देगा, जब वे बहुपक्षवाद में सुधार की बढ़ती मांग पर जवाब देंगे। सुधार आज की जरूरत है। और मुझे विश्वास है कि ग्लोबल साउथ विशेष रूप से दृढ़ रहने के लिए भारत के दृढ़ संकल्प को साझा करता है।"
उन्होंने कहा, बहुपक्षीय संस्थान शायद ही कभी खत्म होते हैं। वे बस अप्रासंगिकता में मिट जाते हैं। एक जमाने में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 'मॉडल यूएन' रोल प्ले और वास्तविक दुनिया के बीच बहुत लंबा फासला था। उन्होंने पूछा कि क्या वह दूरी कम हो रही है।