अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर होने वाली बातचीत बेहद तकनीकी होगी और इसे पूरा होने में कई महीने लग सकते हैं। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के सामने पेश होते हुए रूबियो ने साफ कहा कि आगे की बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब ईरान कुछ अहम शर्तों को मानेगा। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम को लेकर स्पष्ट फैसला लेना शामिल है।
मार्को रूबियो ने कहा कि ईरान को पहले यह भरोसा देना होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य सुरक्षित रहेगा और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर कोई खतरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ईरान को समुद्री बारूदी सुरंगें हटानी होंगी और कारोबारी जहाजों को निशाना नहीं बनाना होगा। रूबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका ने होर्मुज को खोलने के बदले ईरान को किसी तरह की प्रतिबंध राहत की पेशकश नहीं की है। उन्होंने साफ किया कि प्रतिबंधों में ढील केवल सख्त शर्तों के आधार पर ही दी जाएगी।
क्या परमाणु वार्ता लंबी और मुश्किल होगी?
रूबियो ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे बहुत जटिल हैं और इन्हें कुछ दिनों में हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की टीमों को 30, 60 और 90 दिनों तक बैठकर तकनीकी बिंदुओं पर चर्चा करनी होगी। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर लंबे समय तक कड़ी सीमाएं स्वीकार करे या उसे पूरी तरह खत्म करे।
क्या होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा मुद्दा?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण यह इलाका लगातार चर्चा में बना हुआ है। रूबियो ने कहा कि ईरान को यह सुनिश्चित करना होगा कि वहां कोई टोल नहीं लिया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहेगी।
क्या ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हुई है?
मार्को रूबियो ने दावा किया कि हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना अब काफी सीमित रह गई है। हालांकि उन्होंने माना कि ईरान के पास अभी भी बड़ी संख्या में ड्रोन मौजूद हैं और कम लागत वाले ड्रोन आधुनिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
क्या अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान को भारी नुकसान हो रहा है?
रूबियो ने कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से ईरान को हर दिन करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है। उनके मुताबिक ईरानी बंदरगाहों पर लगी रोक से देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। अमेरिका का दावा है कि आर्थिक दबाव के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर मजबूर किया जा रहा है।
ईरान के सर्वोच्च नेता को लेकर रूबियो का बड़ा दावा
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई जीवित हैं और अब नेतृत्व से जुड़े मामलों में लगातार ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति को संबोधित करते हुए रूबियो ने कहा कि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मोजतबा खामेनेई क्षेत्रीय तनाव और वार्ता से जुड़े मुद्दों में भूमिका निभा रहे हैं। मोजतबा खामेनेई फरवरी में हुए हमले के बाद से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। उस हमले में उनके पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे गए थे। इसके बाद से उनकी सेहत और ईरान के नेतृत्व में उनकी भूमिका को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं।