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F-7 Fighter Jet: मिग-21 की रिवर्स इंजीनियरिंग, जानिए बांग्लादेश में क्रैश हुए चीनी विमान के बारे में सबकुछ

Tue, 22 Jul 2025 09:10 AM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

एफ-7 लड़ाकू विमान को ग्रैंडपा फाइटर जेट भी कहा जाता है। बताया जाता है कि यह विमान चीन ने मिग-21 की रिवर्स इंजीनियरिंग करके तैयार किया है। आइए जानते हैं कि एफ-7 लड़ाकू विमान के बारे में सबकुछ...।
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बांग्लादेश में क्रैश हुआ लड़ाकू विमान। - फोटो : PTI
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विस्तार
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बांग्लादेश में सोमवार ढाका के उत्तरा में स्थित एक स्कूल-कॉलेज के परिसर में लड़ाकू विमान एफ-7 के क्रैश होने से 20 लोगों की मौत हो गई। जबकि 171 लोग घायल हो गए। बांग्लादेश में क्रैश हुए इस लड़ाकू विमान को ग्रैंडपा फाइटर जेट भी कहा जाता है। बताया जाता है कि यह विमान चीन ने मिग-21 की रिवर्स इंजीनियरिंग करके तैयार किया है। मौजूदा समय में बांग्लादेश, पाकिस्तान, ईरान, नाइजीरिया, नामीबिया, म्यांमार, उत्तर कोरिया, सूडान, तंजानिया, श्रीलंका और जिम्बाब्वे के पास यह लड़ाकू विमान है। आइए जानते हैं कि एफ-7 लड़ाकू विमान के बारे में सबकुछ...।
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सोवियत संघ के साथ मिलकर किया गया था तैयार
1960 में चीन और सोवियत संघ के मिग-21  बनाने के लिए समझौता किया था। दोनों देशों ने मिलकर मिग-21 बनाए। इसके बाद 1962 में कुछ तकनीकी दस्तावेजों के साथ मिग-21 को शेनयांग कारखाने में भेज दिया गया। जब चीन और सोवियत के संबंध बिगड़ गए और समझौता टूट गया तो चीन ने मिग-21 की रिवर्स इंजीनियरिंग शुरू की। चीन की शेनयांग के इंजीनियरों ने मिग-21 के एफ-13 मॉडल में 249 समस्याओं को पहचाना और इसके समाधान खोजने शुरू किए। इंजीनियरों ने विमान से जुड़े अहम तथ्यों पर गौर किया और समस्याओं का समाधान करते हुए 1964 में जे-71 विमान का उत्पादन किया। यह विमान मिग- 21 जैसा ही दिखता था, जिसमें स्वेप्ट डेल्टा विंग डिजाइन और आगे की ओर एक एयर इनलेट था। लेकिन अंदर से दोनों विमान अलग-अलग थे।

चीन ने किए कई बदलाव
चीन ने रिवर्स इंजीनियरिंग के दौरान मिग 21 में कई बदलाव किए। इंजीनियरों ने मिग 21 के हाइड्रोलिक सिस्टम में खामी पकड़ी और इसे दूर किया। मिग 21 का अधिकांश ईंधन आगे के धड़ में था और लगभग 45 मिनट की उड़ान के बाद विमान अस्थिर हो गया। इसलिए चीन ने एफ-7 में ईंधन टैंकों की स्थिति बदल दी और बड़े ड्रॉप टैंक लगाए। इसके अलावा चीन ने विमान में डब्ल्यूपी-7 इंजन का इस्तेमाल किया, जो रूसी विमान जैसा था। इसमें रूसी NR-30 की तरह ही 30 मिमी की तोप थी और रूसी AA-2 की तरह ही PL-2 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (AAM) भी थी। 
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बांग्लादेश में हादसा - फोटो : Google Earth
चेंगदू कंपनी ने किया उत्पादन
चीन लगातार एफ-7 के मॉडल में बदलाव करता रहा। चीन ने इसका जे-7II मॉडल बनाया। इसमें बेहतर इजेक्शन सीट और बेहतर इंजन - WP-7B था। चीन में इसका उत्पादन चेंगदू कंपनी ने किया, जो कि मौजूदा समय में चीन के जे-10 और जे-20 जैसे लड़ाकू विमानों का उत्पादन कर रही है। 

बांग्लादेश को 2013 में मिला
एफ-7 लड़ाकू विमानों के अस्तित्व में आने के बाद से ही बांग्लादेश ने चीन से इन्हें खरीदने का समझौता कर लिया था। एफ-7 लड़ाकू विमान सिंगल इंजन का हल्का एयरक्राफ्ट है। बांग्लादेश को इस लड़ाकू विमान की आखिरी इकाई 2013 में मिली थी। तबसे लेकर अब तक बांग्लादेश ने इस एयरक्राफ्ट में कई बदलाव कराए।

मौजूदा समय में बांग्लादेश के पास जो एफ-7 मौजूद है, उसे बाकी देशों- मिस्र, पाकिस्तान के पास मौजूद एफ-7 से ज्यादा आधुनिक बताया जाता है। इसमें पूरी तरह कांच की कॉकपिट है, जिसमें मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले और थ्रॉटल-एंड-स्टिक कंट्रोल है, जिससे पायलट की पारिस्थितिक जागरुकता बेहतर हो जाती है। यह लड़ाकू विमान 2.2 मैक की अधिकतम स्पीड हासिल कर सकता है। यह 57,420 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। इसमें बम से लेकर मिसाइलों तक को ले जाने की क्षमता है। बांग्लादेश के पास 36 F-7 विमान हैं। वहीं, पाकिस्तान कम से कम 120 विमानों के साथ F-17 का सबसे बड़ा संचालक है।

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