इंटरनेट हथियारबंद हो गया है। यह उतना ही खतरनाक है, जितना हथियार थामे कोई इंसान। वर्ल्ड वाइड वेब की स्थापना के 29 साल पूरे होने पर संस्थापक टिम बर्नर्स ली ने अपने ब्लॉग में यह चेतावनी दी। टिम ने मार्च, 1989 में राबर्ट साइलाउ के साथ मिलकर वर्ल्ड वाइड वेब की स्थापना की थी।
ब्रिटिश कंप्यूटर वैज्ञानिक ने खुले खत में लिखा, इंटरनेट के नए द्वारपाल हावी हो गए हैं। वह विचार के प्रसार को नियंत्रित कर रहे हैं। इंटरनेट की पूरी ताकत कुछ कंपनियों के पास सिमट कर रही गई है। इससे इंटरनेट के हथियार की तरह इस्तेमाल का खतरा बढ़ गया है।
टिम लिखते हैं, हाल के साल में सोशल मीडिया साइट पर साजिशों की थ्योरी ट्रेंड कर रही है। फर्जी ट्वीट और फेसबुक अकाउंट सामाजिक तनाव बढ़ा रहे हैं। बाहरी ताकतें चुनाव को प्रभावित कर रही हैं और अपराधी निजी डाटा चुरा रहे हैं।
डर गई हैं दुनिया की कई सरकारें
इंटरनेट पर बैन
डर गई हैं दुनिया की कई सरकारें
82 वर्षीय एमआईटी प्रोफेसर टीम का बयान ऐसे समय में आया है, जब कई यूरोपीय देशों ने नए कानून बनाए हैं ताकि वे फर्जी खबरों और नफरत भरे भाषणों को रोक सकें। उन्हें डर है कि ये उनके लोकतंत्र की नींव हिला सकते हैं।
जर्मनी ने इस साल एक जनवरी को एक कानून बनाया है, जिसके मुताबिक अगर नफरत वाले कटेंट 24 घंटे के भीतर नहीं हटे तो इंटरनेट प्लेटफार्म पर 6 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया जाएगा।
फ्रांस में चुनाव के दौरान जजों को इंटरनेट से फर्जी खबरें हटाने का अधिकार देने के कानून पर विचार हो रहा है।
वहीं ब्रुसेल्स और यूरोपियन कमीशन ने कहा है कि नोटिस के एक घंटे के भीतर कट्टरपंथी कंटेंट हटना चाहिए।
संदेह है कि कंपनियां इससे निपटेंगी
संदेह है कि कंपनियां इससे निपटेंगी
आजाद इंटरनेट की वकालत करने वाले टिम कहते हैं कि इंटरनेट कंपनियों का ध्यान ज्यादा से ज्यादा लाभ पर होता है।
इसलिए उन्हें शक है कि वे समस्याएं कम करने का प्रयास स्वयंसेवकों की तरह करेंगी। अब कानून से ही इन समस्याओं से निपटा जा सकता है।