लंदन की अदालत ने एक करोड़पति व्यापारी को इराक और जॉर्जिया जैसे देशों में बम पता लगाने वाले नकली उपकरण बेचने के लिए धोखाधड़ी का दोषी पाया है।
समरसेट के 56 साल के जेम्स मैक्रॉमिक ने कथित रुप से इराक़ में 6,000 से ज़्यादा बम का पता लगाने वाले उपकरण यानी ‘बम डिटेक्टर’ बेचकर पांच करोड डॉलर कमाए और ये सब उन्होंने ये जानते हुए किया कि ये उपकरण काम नही करते।
पुलिस का कहना है कि ये उपकरण अब भी इराक़ में कुछ सुरक्षा चौकियों पर इस्तेमाल में आ रहे है।
अब भी होता है इस्तेमाल
बम का शिकार हुए एक इराक़ी व्यक्ति ने बीबीसी से कहा कि जेम्स मैक्रॉमिक 'नैतिक रूप से दिवालिया' हो चुके हैं।
लंदन में ओल्ड बेली में मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जेम्स मैक्रॉमिक का हर उपकरण 40,000 डॉलर का था, और ये पूरी तरह से निष्प्रभावी थे। साथ ही विज्ञान की कसौटी पर भी खरे नही उतरते।
अभियोजन पक्ष की ओर से वकील का कहना था कि जेम्स मैक्रॉमिक की कंपनी के सुरक्षा उपकरण काम नहीं करते थे और ये बात वो अच्छी तरह से जानते थे।
जेम्स मैक्रॉमिक का दावा था कि उनके उपकरण बम छिपाए जाने के सभी संभव तरीकों को दरकिनार करके विस्फोटकों को खोजने मे सक्षम हैं।
इन उपकरणों के बारे में ये भी दावा किया गया था कि ये पानी के भीतर, हवा में हर जगह काम करने में सक्षम हैं, यहां तक कि ज़मीन के एक किलोमीटर नीचे भी किसी बम की पड़ताल कर सकता है।
गोल्फ की गेंद
पर सच्चाई ये है कि जेम्स मैक्रॉमिक का ये उपकरण गोल्फ़ की गेंद को ढूंढ़ने के आधार पर काम करता है और इसे अमरिका से खरीदा गया था। इसका इलेक्ट्रॉनिक्स से कोई लेना देना नही था।
पुलिस का कहना था कि मैक्रॉमिक ने उन लोगों की सुरक्षा को दर किनार कर दिया जिन्होंने खुद की सुरक्षा और संरक्षण के लिए इस डिवाइस पर भरोसा किया।
अदालत में दलील दी गई कि इस बात का कोई सबूत नही है कि मैक्रॉमिक ने रक्षा मंत्रालय के लिए अपने उत्पादों को बेचने की कोशिश की थी।
रिश्वत
बीबीसी के दो न्यूज़नाइट कार्यक्रमों में मैक्रॉमिक के बेचे गए उपकरणों की पड़ताल की गई थी। जिसके बाद ब्रिटेन सरकार ने जनवरी 2010 में इराक़ और अफ़गा़निस्तान में उनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।
जांच में पाया गया कि वरिष्ठ इराक़ी अधिकारी इस बात को जानते थे कि ये उपकरण काम नहीं करते है और आरोप लगाया गया कि इनकी खरीद सुनिश्चित करने के लिए के लिए कुछ लोगों को रिश्वत दी गई थी।
न्यूज़नाइट कार्यक्रम के अनुसार 2008 से 2010 के बीच इराक़ में 6,000 उपकरणों की खरीद की गई थी और इसके लिए चार करोड़ डॉलर से अधिक खर्च किए गए। इस समय बगदाद बम निरोधक दस्ते के प्रमुख जनरल जिहाद अल जाबिरी के साथ दो अन्य इराक़ी अधिकारी भी भ्रष्टाचार के चलते जेल में बंद है।
एक वरिष्ठ इराक़ी अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि इन बेकार उपकरणों ने सैनिकों में सुरक्षा की झूठी भावना पैदा की और इस मामले में कोई भी सज़ा उन घावों को नही भर सकती, क्लिक करें जिनमें लोग मारे गए।
इराक़ में अभी भी चौकियों पर सुरक्षा कर्मी अभी भी इन उपकरणों का इनका इस्तेमाल कर रहें हैं, ये सोचकर कि ये काम करता है। अदालत ने मैक्रॉमिक को सशर्त जमानत दी है, उन्हें 2 मई को सजा सुनाई जाएगी।