''उत्तर कोरिया घास खा सकता है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ सकता।'' रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ये शब्द बताते हैं कि उत्तर कोरिया की सरकार अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कितनी प्रतिबद्ध है।
पुतिन की यह बात भले ही हमें बहुत ज़्यादा बढ़ा-चढ़ा कर कही गई लगे, लेकिन पिछले 20 सालों में उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु ताकत को इस हद तक बढ़ा दिया है कि उसकी ज़द में अमेरिका भी आ गया है।
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साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर पहली बार प्रतिबंध लगाया था। उसके बाद अलग-अलग तरीकों से 6 बार इस देश पर प्रतिबंध लगते चले गए। अब एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उत्तर कोरिया पर कुछ नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है जिसमें उसे मिलने वाली तेल की सप्लाई पर रोक और किम जोंग उन की संपत्ति ज़ब्त करना शामिल है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया के साथ व्यापार को पूरी तरह समाप्त करके उसकी अर्थव्यवस्था को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि दुनिया के कौन-कौन से देश उत्तर कोरिया के साथ व्यापार करते हैं।
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चीन सबसे बड़ा सहयोगी
उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था के बारे में दक्षिण कोरिया ट्रेड प्रमोशन एजेंसी (कोटरा) द्वारा जुलाई 2016 में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि दुनिया के लगभग 80 देश उत्तर कोरिया के साथ व्यापार करते हैं। इन देशों में भारत, जर्मनी, सिंगापुर, फ्रांस, पुर्तगाल और फिलिपींस शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साल 2016 में उत्तर कोरिया के व्यापार का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा चीन के जरिए ही हुआ।