हांगकांग में हर व्यक्ति एक दिन में तकरीबन आधा किलो भोजन बर्बाद करता है और ये बात सरकार के साथ-साथ देश के लिए भी चिंता का विषय है।
सरकार ने इसके लिए 'रिसाइकलिंग' जैसी योजनाएं शुरू की है और भोजन बर्बाद करने वाले पर शुल्क लगाने की भी तैयारी कर ली है।
इसके अलावा दो दर्जन सामाजिक संस्थाएं और सरकारी संगठन भोजन को 'रिसाइकल' करने में जुटे हैं। साथ ही आम लोगों के बीच जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार की ये नीतियां हांगकांग के लोगों के इस परंपरावादी स्वभाव के खिलाफ कारगर हो पाएगी?
क्या बदल रहे हैं लोग?
हांगकांग के 'ताई वो' बाज़ार में कुछ दुकानदार फलों, अंकुरित अनाजों और सब्जियों से खराब माल छांटकर अगले दिन बेचते हैं।
वहीं दूसरे बाज़ारों में दुकानदार इन्हें एक डिब्बे में डाल देते हैं जिसे हांगकांग का 'व्यापारिक संघ' एकत्रित करके गरीबों और बेरोजगारों को भोजन मुहैया कराता है।
'ताई वो' बाजार में इस परियोजना से संबंधित क्रिस्टिना जैंग का कहना है, ''आमतौर पर हम हर रोज 180 किलो भोजन जमा करते हैं जिनमें 70 फीसदी हिस्सा खाने लायक होता हैं और यह भोजन कम से कम 60 लोगों का पेट भरता है।''
बर्बादी की परंपरा
हांगकांग के लोग बुफे सिस्टम के दीवाने होते हैं और माना जाता है कि ये परंपरा भोजन की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण है।
एक अनुमान के मुताबिक, साल 2011 में 3,600 टन भोजन बर्बाद किया गया जो 2010 के मुकाबले 11 फीसदी अधिक था।
एक संस्था 'फ्रेंड्स ऑफ द अर्थ' ने जो आंकड़े पेश किए हैं, उसके मुताबिक हांगकांग में हर आदमी हर दिन आधा किलो भोजन बर्बाद करता है।
वहीं भोजन की बर्बादी का यही आंकड़ा सिंगापुर में 0।36 किलो, ताइवान में 0।35 किलो और दक्षिण कोरिया में 0।29 किलो है।
इस संस्था ने जागरुकता अभियान के तहत शादी-ब्याह, औद्योगिक भोज और अन्य बड़े कार्यक्रमों में थोड़ा कम भोजन परोसे जाने का आग्रह किया है।
शहर में दो तिहाई भोजन की बर्बादी घरों में होती है जबकि एक तिहाई सुपरमार्केट, खाद्य बाज़ारों, रेस्तरां, होटल और स्कूल में बर्बाद होता है।
जहां तक 'रिसाइकलिंग' की बात है तो सरकार की ये योजना हर इलाके तक नहीं पहुंच पाई है, इसलिए पूरी तरह से सफल भी नहीं है।
उपायों पर जोर
हांगकांग विश्विद्यालय की वैज्ञानिक कैरोलिन इस बर्बादी को रोकने के लिए रिसाइकिलंग के अलावा बायो-तकनीक के इस्तेमाल की सलाह देती हैं।
उनका कहना है कि बेकरी सामानों को रिसाइकल कर एक ऐसा तेजाब तैयार किया जा सकता है जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक और फैब्रिक उत्पादन में हो सकता है।
वैसे यहां की सरकार ने भोजन की बर्बादी करने वाले पर टैक्स लगाने की योजना भी बनाई है।
अब यहां के बच्चे भी भोजन को बचाने और फेंके जाने वाले भोजन के सही इस्तेमाल में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
ये बच्चे फेंके जाने वाले फलों और सब्जियों को जमा कर उन बच्चों में बांट देते हैं जो भूखे होते हैं।
शिक्षक इसे बड़े उपाए के तौर पर देखते हैं क्योंकि इससे बच्चे खुद भोजन की बर्बादी करने के पहले कई बार सोचते हैं।