साल 2015 में रूस और इस्टोनिया के बीच जासूसों की अदला-बदली में भी एफएसबी की भूमिका थी। उस घटना ने शीत युद्ध के दिनों की यादें ताजा कर दी थीं। नैटो के सदस्य देश इस्टोनिया ने रूस पर जेल में बंद अपने जासूस को रिहा कराने के लिए उसके सुरक्षा अधिकारी को अगवा करने का आरोप लगाया था।
साल 2002 में चेचेन्या में अरब जिहादी कमांडर खत्तब की हत्या कर दी गई। इसका सेहरा भी एफएसबी के सिर बंधा था। चेचेन कमांडरों ने कहा कि खत्तब को जहर लगी चिट्ठी मिली थी। लेकिन एलेक्जेंडर लिटविनेंको मर्डर केस ने एफएसबी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया।
लितविनेंको मर्डर केस
एलेक्जेंडर लितविनेंको एफएसबी के पूर्व अधिकारी थे और उनका नाम पुतिन के मुखर आलोचकों में शुमार किया जाता था। साल 2006 में एलेक्जेंडर लितविनेंको को लंदन में जहर देकर मार दिया गया था। ये जहर रेडियोएक्टिव पदार्थ पोलोनियम था। ब्रिटेन ने लितविनेंको को शरण दी थी और रूस में उन्हें गद्दार कहा जाता था।
ब्रिटेन में इसकी आधिकारिक जांच हुई और इसकी रिपोर्ट में कहा गया कि लितविनेंको की हत्या को संभवतः पुतिन और एफएसबी के तत्कालीन प्रमुख निकोलाई पात्रुशेव ने मंजूरी दी थी। रूस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और नेशनल हीरो का दर्जा रखने वाले सांसद आंद्रेई लुगोवोई को लितविनेंको की हत्या का प्रमुख संदिग्ध बताया। एलेक्जेंडर लितविनेंको ने एफएसबी पर एक खुफिया दस्ता चलाने का आरोप लगाया था जिसका काम दुश्मनों का कत्ल करना था।
लितविनेंको के मुताबिक इस खुफिया दस्ते के टारगेट पर बोरिस बेरेजोवस्की जैसे ताकतवर लोग थे। एलेक्जेंडर लितविनेंको की मौत के कुछ साल बाद बोरिस बेरेजोवस्की ने 2013 में ब्रिटेन में खुदकुशी कर ली। लितविनेंको की मौत के कुछ हफ्ते पहले ही रूस ने एक कानून बनाकर फेडरल सिक्योरिटी सर्विस को देश के भीतर और बाहर चरमपंथियों और विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
पुतिन के कुछ मुखर विरोधियों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई। इनमें कुछ पत्रकार भी थे। कहा गया कि इन हत्याओं के पीछे एफएसबी का हाथ है। लेकिन सरकार की तरफ से हमेशा यही कहा गया कि मरने वाले के और भी दुश्मन थे जो उन्हें निशाना बना सकते थे।
एफएसबी पर किताब
रूस में एफएसबी को ये अधिकार है कि वो लोगों को अपराध के हालात पैदा करने के लिए चेतावनी दे सकता है। आंद्रेई सोल्दातोव और एरीना बोरोगन ने हाल ही में एफएसबी पर किताब लिखी है। किताब का नाम है 'द न्यू नोबिलिटी'। इस किताब में आंद्रेई और एरीना ने ये बताया है पुतिन ने एफएसबी का विस्तार किया है।
उसके एजेंट्स विशेष अभियानों पर विदेश भेजे गए। इसमें खुफिया जानकारी इकट्ठा करने का काम भी शामिल था। लेकिन ब्रिटेन के एमआईसिक्स (MI6) के तर्ज पर रूस के लिए विदेशों में खुफिया गतिविधियों को अंजाम देने का काम एक्सटर्नल इंटेलिजेंस सर्विस पर था। मिलिट्री स्पाई सर्विस के एजेंट भी विदे्शों से खुफिया सूचनाएं इकट्ठा करते हैं।
डॉक्ट्रिन ऑफ इन्फॉर्मेशन वारफेयर में एफएसबी रूस के लिए मोर्चा संभाले हुए है। उसका काम सोशल मीडिया पर पब्लिक ओपिनियन भी तैयार करना है। अमेरिका में सरकारी अधिकारियों का ये मानना है कि रूस ने हैकिंग और गलत जानकारी फैलाकर 2016 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की।
मार्च, 2017 में अमेरिका ने एफएसबी के दो अफसरों पर याहू अकाउंट्स हैक करने और लाखों लोगों से जुड़े डेटा चोरी करने का आरोप लगाया। एफएसबी के ये अधिकारी थे डिमित्री डोकुचाएव और इगोल सुशचिन। एफएसबी को इंटरनेट पर निगरानी करने का कानूनी हक मिला हुआ है। आंद्रेई सोल्दातोव का कहना है कि रूस में टेलीकॉम सर्विस मुहैया कराने वाली कंपनियों को एफएसबी को अपने नेटवर्क में सीधे एक्सेस देना होता है।
पुतिन से नजदीकी
सेंट्रल मॉस्को एफएसबी का मुख्यालय लुबियंका है। ये इमारत एफएसबी की ताकत का प्रतीक है। सोवियत संघ के जमाने में केजीबी इसी इमारत में राजनैतिक कैदियों से पूछताछ किया करती थी। एफएसबी के चीफ एलेक्जेंडर बोर्तनिकोव सीधे राष्ट्रपति पुतिन के लिए जवाबदेह हैं।
साल 2000 में एफएसबी के तत्कालीन चीफ निकोलाई पात्रुशेव ने एफएसबी एजेंटों को "मॉडर्न नोबल" या "आधुनिक भद्र लोग" कहा था। राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग के पुराने जासूसों को बड़े पदों पर बिठाया। रूस की प्रमुख समाजशास्त्री ओल्गा क्रिश्तानोवस्काया कहती हैं, "हम पुतिन के नेतृत्व में केजीबी की पुरानी ताकत को फिर से बहाल होता हुआ देख रहे हैं। पुतिन जब पहली बार राष्ट्रपति बने थे तो उनकी टीम में ज्यादातर लोग सिलोविकी थे यानी पुराने जासूस।"
रूस के क्रीमिया पर कब्जे से नाराज यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने मौजूदा वक्त में बोर्तनिकोव समेत ज्यादातर एलीट जासूसों पर प्रतिबन्ध लगा रखा है। साल 1990 में जब विदेशी व्यापार की कमान पुतिन के हाथ में थी तब उनके पुराने सहयोगियों के नाम अपराध में लिप्त पाए गए थे।
इनका ब्योरा अमरीकी रिसर्चर केरेन डॉविशा की किताब 'पुतिन्स क्लेप्टोक्रेसी' में दिया गया है। ये आरोप 'लित्विनेको इन्क्वायरी' और रूसी माफिया से सम्बन्धित एक प्रमुख स्पैनिश जांच में सामने आए थे। स्पैनिश वकील जोस ग्रिन्डा ने अमरीकी अधिकारियों को बताया था कि एफएसबी रूस में ऑर्गनाइज्ड क्राइम को कंट्रोल कर रही है।