एक जापानी प्रोफेसर पर उर्दू का ऐसा नशा छाया है कि वो नींद में भी उर्दू के ही सपने देखते हैं। मशहूर लेखक मुल्कराज आनंद की एक किताब ने जापान के सो यामाने की ज़िंदगी को बदल दिया। और आज वो इस सफ़र में वहां पहुंच गए कि वो ओसाका विश्वविद्यालय में उर्दू के प्रोफ़ेसर हैं और उर्दू शायरी में भी हाथ आज़मा रहे हैं।
हाल ही में दिल्ली आए सो यामाने ने बीबीसी से ख़ास बातचीत की। जिसमें उन्होंने हिंदुस्तान, हिंदुस्तानी और उर्दू से अपनी मुहब्बत पर खुलकर बात की। वो कहते हैं कि उर्दू ग़ज़ल को समझना है तो मुहब्बत में नाकाम होना ज़रूरी है। वो खुद भी मुहब्बत में नाकाम होने के बाद अब ऐसी ग़ज़लें लिखते हैं।
यामाने ने अपनी प्रेमिका के बारे में बताया, "वो उर्दू नहीं जानती थी, लेकिन उर्दू के बारे में जानती थी।" तो क्या उन्हें अपनी महबूबा को उर्दू नहीं सिखानी चाहिए थी, इस पर वो ठहाका मार कर कहते हैं, "हां सिखानी तो थी, लेकिन उन्होंने मुझे बेवफ़ाई सिखाई।"
सो यामाने की शायरी
दूसरों के ग़म में रोना चाहिए, तेरा दुख मेरा भी होना चाहिए
फैलती जाएगी उर्दू कू-ब-कू, बीज उसका दिल में बोना चाहिए
मेरे अश्क़ों में तेरी तस्वीर हो, और मुझको ख़ूब रोना चाहिए
जागता रहता हूं उसके हिज्र में, सो यामाने अब तो सोना चाहिए