हाल ही में इस्राइल द्वारा विवादित क्षेत्र में यहूदियों की बस्ती बसाने के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पारित होने के बावजूद इस्राइल उसी जगह पर बस्तियां बसाने पर अडिग है। इस्राइल सरकार ने चुनौतीपूर्ण लहजे में कहा कि वह पूर्वी येरुशलम में हजारों नए घर बनाएगी। उसने किसी भी कार्रवाई के लिए चेतावनी देते हुए कहा कि इस्राइल किसी भी गुस्ताखी पर चुपचाप होकर बैठने वाला नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका द्वारा वीटो न करने के बाद इस्राइल द्वारा फलस्तीन क्षेत्र में बसाई जा रही यहूदियों की बस्ती के खिलाफ कुछ ही दिन पहले प्रस्ताव पारित हो चुका है। लेकिन येरुशलम की स्थानीय निकाय सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह अपनी कार्रवाई से अब पीछे नहीं हटेगी।
इस नई बसाहट के लिए 600 हाउसिंग यूनिटों को स्वीकृति दी जा चुकी है जिस पर फलस्तीन अपना दावा करता रहा है। यहां यहूदी बस्तियों के लिए कुल 5,600 नए घरों का निर्माण होना है।
इस बीच इस्राइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा परिषद से जुड़े सभी देशों के साथ राजनयिक रिश्ते तोड़कर वहां से अपने राजदूत वापस बुला लिए हैं। पीएम ने अमेरिकी राजदूत को सभी सहयोग खत्म करते हुए उन्हें सम्मन जारी कर कड़ी फटकार भी लगाई।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस सप्ताह अपनी यूक्रेन की पूर्व नियोजित यात्रा भी रोक दी है। उन्हें आशंका है कि बराक ओबामा अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में इस्राइल के खिलाफ और कड़े कदम उठाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि - ‘इस्राइल एक राष्ट्रीय गौरवशाली देश है और वह किसी के आगे नहीं झुकेगा।’ उन्होंने कहा कि - ‘संयुक्त राष्ट्र ने हमारे साथ जो किया है वह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।’