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जी-7 की बैठक में यूक्रेन मुद्दे की गूंज

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जी-7 के नेता बातचीत के लिए जब टेबल पर बैठे तो अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल आजूबाजू बैठे थे। ये रूस की ओर सीधा इशारा था कि यूक्रेन अकेला नहीं है। दरअसल राष्ट्रपति ओबामा ने अपना इरादा तभी साफ़ कर दिया था जब वो पोलैंड में थे।
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पोलैंड में ओबामा ने कहा था, ''साम्राज्य और उसके असर के दिन लद गए हैं। बड़े देश, छोटे देशों पर अपनी मर्ज़ी नहीं थोप सकते। रूस ने क्राईमिया पर क़ब्ज़ा जमाया है। हम इसे मंज़ूर नहीं करेंगे। ये यूक्रेन की सम्प्रभुता का उल्लंघन है। स्वतंत्र राष्ट्र एकजुट रहेंगे। रूस ने और उकसाने वाली कोई हरक़त की तो उसे इसकी क़ीमत चुकानी होगी।''

पौलेंड में कही इस बात को ब्रसेल्स में राष्ट्रपति ओबामा की मौजूदगी में जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने चेतावनी के स्वर में आगे बढ़ाया।
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जर्मनी भी यूक्रेन के साथ

जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल कह रही थीं, ''हमने अपने बयान में ये स्पष्ट कर दिया है कि हम आर्थिक मुद्दों पर यूक्रेन की मदद करेंगे, रूस के साथ बात करेंगे, लेकिन अगर इससे बात आगे नहीं बढ़ती है तो रूस के ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे, क्योंकि हम यूक्रेन को और अधिक डगमगाता हुआ नहीं देख सकते।''

वहीं यूरोपीय कमीशन के अध्यक्ष जोस बरोसो ने बीबीसी से कहा कि रूस और जी-सात के बाकी देशों के बीच बातचीत जारी रखना ज़रूरी है।

यूरोपीय कमीशन के अध्यक्ष जोस बरोसो कह रहे थे, ''ये बड़ी अहम बात है कि व्लादिमीर पुतिन के रूस को हम जी-आठ का एक वैधानिक सदस्य स्वीकार नहीं कर सकते हैं। लेकिन फिर भी हमने रूस के साथ बातचीत के दरवाज़े खुले रखे हैं, क्योंकि यूक्रेन संकट के समाधान में रूस की अहम भूमिका है।''
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पुतिन मिलने के लिए तैयार

इस तमाम बयानों के बीच रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने फ्रेंच टेलीविज़न को दिए साक्षात्कार में कहा कि वे यूक्रेन के नए राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको से मिलने के लिए तैयार हैं।

राष्ट्रपति पुतिन कह रहे थे, ''मुझे लगता है कि पोरोशेंको के पास अच्छा अवसर है। उनके हाथ अभी तक ख़ून से रंगे नहीं हैं और वे कार्रवाई रोककर अपने देश के लोगों से सीधे बात कर सकते हैं।''

पुतिन और अन्य देशों के नेताओं के ये तमाम बयान ऐसे समय आए हैं जब यूक्रेन के पूर्वी इलाक़ों में रूस समर्थक अलगाववादियों और सेना के बीच भीषण लड़ाई जारी है।

यूक्रेन और उसका समर्थन कर रहे पश्चिमी देश इस लड़ाई के लिए रूस को ज़िम्मेदार बताते हैं, लेकिन रूस का कहना है कि इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है। इसी तनातनी की वजह से ये बैठक ब्रसेल्स में की गई है। जबकि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के हिसाब से इसका आयोजन रूस के सोची शहर में होना था।
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