ऐसा लगता है कि ट्विटर पर 'फ़र्ज़ी फ़तवों' की वजह से अरब जगत को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे ही एक फ़तवे में तो दुबई जाने पर प्रतिबंध लगाने की बात तक कही गई है।
संयुक्त अरब अमीरात ने इन 'फ़र्ज़ी फ़तवों' को लेकर चेतावनी भी जारी की है। रमज़ान के महीने में ऐसे अनधिकारिक धार्मिक फ़तवों की संख्या में इज़ाफ़ा देखा गया है।
अमीरात के प्रमुख मुफ्ती ने इस बात को लेकर चेतावनी जारी की है कि ऐसे ट्वीट्स बिना जरूरी खोजबीन के दोबारा ट्वीट (रिट्वीट) न किया जाएगा।
अंग्रेज़ी अख़बार गल्फ़ न्यूज़ ने डॉक्टर अहमद अल हद्दाद के हवाले से कहा, "विचार और फ़तवे में अंतर होता है। फ़तवों के बारे में यह माना जाता है कि वे खु़दा के फै़सलों की व्याख्या होते हैं। इसलिए केवल उन्हीं भरोसेमंद शेखों को इसे जारी करना चाहिए जिनमें कुछ खास योग्यताएँ हों और जो इन चीज़ों के बारे में जानकारी रखते हों।"
सोशल मीडिया
अख़बार कहता है कि इस तरह के संदिग्ध फ़तवों का चलन इस क्षेत्र में सोशल मीडिया के उभार के साथ बढ़ा है।
अख़बार ने उन रिपोर्टों का हवाला दिया है जिनमें सउदी अरब को ट्विटर पर विश्व का दूसरा सबसे तेज़ी से सक्रिय होता देश बताया गया है।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस क्षेत्र में ट्वीटर के दूसरे सबसे अधिक संख्या में इस्तेमाल करने वाले संयुक्त अरब अमीरात से हैं।
अख़बार ने टेलीकॉम कंपनी एटिलसैट के अली अल अहमद के हवाले से बताया है कि दुबई जाने को हराम करार देने वाला फ़र्ज़ी फ़तवा बहुत तेज़ी से फैला।
इसका असर यह हुआ कि एक जाने माने समाचार चैनल को एक जानकार आदमी का इंटरव्यू करना पड़ा। इंटरव्यू में उस जानकार ने आम लोगों को यह बताया कि फ़तवा ग़लत है।
बीबीसी मॉनिटरिंग सेवा