केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव अमित खरे ने शुक्रवार को कहा, ओवर द टॉप (ओटीटी) पर फिल्मों की तरह कोई सेंसरशिप नहीं है। संबंधित प्लेटफॉर्म खुद अपनी सामग्री का वर्गीकरण करेंगे। इसका मकसद यह है कि लोगों को सामग्री देखने से पहले उसकी सही जानकारी मिले। उन्होंने कहा, इसके लिए तीन व्यापक उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं- संस्थागत तंत्र, नागरिकों को सशक्त बनाने वाली शिकायत प्रणाली और इस क्षेत्र को विनियमित करने के लिए विभिन्न मीडिया के लिए एकसमान मानक हो।
केंद्र सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को जारी सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नए दिशा-निर्देशों पर खरे ने कहा कि हम जानते हैं कि मीडिया के प्रकार अलग-अलग हैं। प्रिंट मीडिया टीवी से अलग है, टीवी फिल्मों से अलग है और फिल्में वेब सीरीज से अलग हैं। हम सभी के लिए एक मानक नहीं रख सकते लेकिन अंत में कोई एक तरह की समानता होनी चाहिए। ओटीटी और डिजिटल मीडिया के लिए एक सामान्य, स्वनियमन वाली प्रक्रिया तय की गई है जिसमें सरकार का दखल न्यूनतम रहेगा।
उम्र को आधार माना, जो अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया
खरे ने कहा, ओटीटी के गाइड लाइन बनाने के लिए हमने उम्र को प्रमुख आधार माना है, जो कि एक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया है। सिनेमा की तरह सीबीएफसी ने ओटीटी पर सामग्री का कोई वर्गीकरण नहीं किया है। उम्र के अनुसार सामग्री का वर्गीकरण ये प्लेटफॉर्म खुद करेंगे। वे ही उम्र के मानकों के अनुसार सामग्री होने की सूचना देंगे।