नेपाल की कुल जनसंख्या के दस फीसदी लोग देश के बाहर विभिन्न देशों में काम करते हैं। भारत के भीतर भी बड़ी तादाद में ये नेपाली नागरिक सुरक्षा गार्डों का काम करते हैं। लेकिन पिछले 8 साल के नेपाल सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशों में 5000 नेपाली लोग मौत का शिकार हुए हैं।
यह संख्या इराक युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों से भी ज्यादा है। अब अगले वर्ष इन मौतों की जांच की योजना बनाई जा रही है। इन लोगों की मौत का कारण अक्सर प्राकृतिक बताया जाता है, जिसका अर्थ दिल का दौरा या ऐसी ही कुछ स्वाभाविक मौत होती हैं। लेकिन डॉक्टर मौत के इस कारण पर संदेह जताने लगे हैं, क्योंकि यह एक पैटर्न है जो हर मौत में नजर आता है।
यानी थका-हारा नेपाली काम के बाद बिस्तर पर लेटा और फिर उठ नहीं पाया। अमेरिका में 70 के दशक में और सिंगापुर में 80 के दशक में ऐसा ही हुआ, जिसके तहत एक बार सोने के बाद नेपाली नागरिक दोबारा उठा ही नहीं। अब इन मौतों के कारणों की जांच की योजना बनाई जा रही है जो अगले साल शुरू होगी।
नेपाल सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2008 में करीब 2 लाख 20 हजार नेपाली विदेशों में नौकरी करने गए थे जो 2015 में बढ़कर दोगुने हो गए हैं। 2016 में कुल पांच लाख लोग विदेश गए, जबकि ताबूतों में लौटकर आने वाले नेपालियों की संख्या कई गुना ज्यादा बढ़ गई है।