रविवार देर रात तीन दिवसीय भारत दौरे पर आईं ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा पे अपने उन 6 सैनिकों की रिहाई का तोहफा पा सकती हैं, जिन्हें प्रशांत महासागर में जहाज के अंदर अवैध हथियार रखने के आरोप में वर्ष 2013 में चेन्नई में पांच साल की सजा सुनाई गई थी। थेरेसा की भारत यात्रा से पूर्व आए ब्रिटिश के वर्तमान और पूर्व विदेश मंत्रियों ने इस संबंध में सरकार से पूर्व सैनिकों की रिहाई का अनुरोध किया था।
बकौल सरकारी सूत्र इस मामले में भारत सरकार का रुख सकारात्मक था। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ब्रिटिश समकक्ष को पूर्व सैनिकों की रिहाई का तोहफा दे सकते हैं। गौरतलब है कि दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच सोमवार को द्विपक्षीय वार्ता होनी है। इस द्विपक्षीय वार्ता में निवेश, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, व्यापार, रक्षा क्षेत्र में अहम समझौतों की संभावना है। इसके अलावा दोनों देश आतंकवाद से निपटने के तरीके पर गंभीर मंथन करेंगे।
ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन (ईयू) से बाहर आने के बाद ब्रिटिश पीएम की यूरोपीय देशों के बाहर इस पहली यात्रा को बेहद अहमियत दी जा रही है। दरअसल भारत में प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश के मामले में ईयू तीसरा सबसे बड़ा निवेशक रहा है। अब जबकि ब्रिटेन ईयू से अलग हो रहा है, तब ब्रिटेन के सामने भारत से और भारत के सामने ब्रिटेन और ईयू से नए सिरे से संबंध विकसित करने की चुनौती है।
सोमवार को होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देश रक्षा, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अहम समझौतों के जरिए द्विपक्षीय रिश्तों में और मजबूती आने का संदेश दे सकते हैं। इसके अलावा भारत को उड़ी आतंकी हमला, सीमा पार आतंकवाद पर ब्रिटेन का खुला समर्थन हासिल होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि ब्रिटेन पहले ही उड़ी आतंकी हमले की निंदा कर चुका है।