पोप फ्रांसिस ने पादरियों के द्वारा बच्चों के यौन शोषण की वज़ह से हुए 'शैतानी' नुकसान के लिए माफ़ी मांगी है।
वेटिकन रेडियो द्वारा दिए गए उद्धरण में, उन्होंने बच्चों के साथ हुए यौन शोषण को "चर्च के पादरियों द्वारा की गई नैतिक क्षति" के रूप में वर्णित किया, और कहा कि उन पर "प्रतिबंध" लगाया जाएगा।
इसे इस मुद्दे पर अब तक के सबसे मजबूत बयान के रूप देखा जा रहा है। इससे पहले पादरियों द्वारा बच्चों के यौन शोषण के मामले में पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं देने के लिए वेटिकन की आलोचना की गई थी।
नैतिक क्षति के लिए चिंता
पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र की आलोचना के बाद पोप फ्रांसिस ने दृढ़ता से पादरियों द्वारा यौन शोषण से निपटने के मामले में रोमन कैथोलिक चर्च के रिकॉर्ड का बचाव किया था।
संयुक्त राष्ट्र ने यह कहते हुए वेटिकन की आलोचना की थी कि चर्च अपनी प्रतिष्ठा को बचाने में लगा है। जिसे चर्च ने कड़े शब्दों में ख़ारिज किया था।
रोम से बीबीसी के डेविड विले की रिपोर्ट के मुताबिक़ पोप ने यौन शोषण के पीड़ितों के मदद के लिए पिछले साल एक समिति का गठन किया था लेकिन कुछ कैथोलिक पादरियों के द्वारा इससे नैतिक और मानसिक क्षति होने का आरोप लगाने के बाद इस क़दम से पैर खींच लिए गए।
वेटिकन रेडियो वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक़ पोप फ्रांसिस ने शुक्रवार को कैथोलिक बच्चों के ग़ैर सरकारी संगठन के साथ बैठक के दौरान बयान दिया।
उन्होंने कहा कि वह " व्यक्तिगत रूप से ( कुछ पादरियों के द्वारा ) बच्चों के साथ हुए यौन दुर्व्यवहार से हुए नुकसान के लिए माफ़ी मांगने के लिए बाध्य महसूस कर रहे थे।
कैथोलिक चर्च पर आरोप लगे थे कि दुनिया भर में उसके पादरियों ने बड़ी संख्या में बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार किया।
पोप ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वेटिकन क़ानून को भी और सख्त बनाया। उन्होंने नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों की परिभाषा को व्यापक बनाया और उसमें बच्चों के यौन शोषण को शामिल किया।