लंदन की अपील कोर्ट ने जांबिया के करीब दो हजार नागरिकों को इसकी इजाजत दे दी है कि वो बहुराष्ट्रीय खनन कंपनी वेदांता के खिलाफ ब्रिटिश कोर्ट में केस लड़ सकते हैं। वेदांता का मुख्यालय लंदन में हैं और ये कंपनी अपनी सब्सिडेरी कोनकोल कॉपर माइन्स के जरिए जांबिया में खनन का काम कर रही है।
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वेदांता ने निचली अदालत के इसी साल मई में दिए गए एक फैसले के खिलाफ अपील कोर्ट का रुख किया था। अपील कोर्ट ने कंपनी की अपील को खारिज कर दिया है। वेदांता का कहना था कि चूंकि यह मामला जांबिया से जुड़ा है मामले की सुनवाई जांबिया में की जानी चाहिए।
जांबिया के करीब दो हजार नागरिकों (गांववालों) का आरोप है कि कंपनी के काम के कारण उनके पर्यावरण और जमीनों को नुकसान पहुंचा है। गांववालों के अनुसार नचांगा कॉपर माइन के कारण उनके इलाके का पानी प्रदूषित हो गया है और इसका सीधा असर उनकी जमीन और जीविका पर पड़ा है।
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इस फैसले के बाद अब दूसरे देश में किए जाने वाले काम के लिए अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ लंदन की अदालत में मामला लाए जा सकते की संभावना बढ़ गई है। वेदांता का कहना है कि वो अपील कोर्ट के फैसले के खिलाफ ब्रितानी सुप्रीम कोर्ट में जाएगी। अफ्रीका में बसा चारों तरफ से दूसरे देशों के घिरा जांबिया इस प्रायद्वीप में तांबा का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।