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वो जानवर जो विलुप्त होने के कगार पर

Mon, 18 Jul 2016 07:33 PM IST
बीबीसी/मेलिसा होगेनबूम
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- फोटो : BBC
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दुनिया में ऐसे कई जानवर हैं जिनके हमेशा के लिए मिट जाने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसा ही जानवर है, वैक्विटा पॉरपॉइज या सुइंस। डॉल्फिन और व्हेल की नस्ल के ये समुद्री जानवर अमरीका और मेक्सिको के समंदर से लगे इलाकों में पाए जाते हैं।
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1997 में इनकी तादाद पांच सौ के आस-पास थी। 2008 में इन सुइंस की संख्या घटकर 245 रह गई। आज कहा जा रहा है कि कैलिफोर्निया की खाड़ी में महज 50 वैक्विटा पॉरपॉइज ही बची हैं।

डॉल्फिन की ये बहनें, कैलिफोर्निया की खाड़ी में ही पाई जाती हैं। ये सेटासियन नस्ल के जानवर हैं। इनमें व्हेलें, डॉल्फिन और दूसरी पॉरपॉइज आती हैं। अपने ग्रुप के ये सबसे छोटे स्तनपायी जीव हैं।
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समुद्री जानवरों की हो रही जासूसी

- फोटो : BBC
आजकल इन्हें बचाने के लिए मेक्सिको के कुछ लोग, इन समुद्री जानवरों की जासूसी करते हैं। इससे ये पता लगाने की कोशिश की जाती है कि आखिर समंदर में कितनी वैक्विटा पॉरपॉइज बची हैं।

अक्सर इन्हें डॉल्फिन समझ लिया जाता है। दोनों में ज्यादा फर्क होता भी नहीं। लेकिन डॉल्फिन के मुकाबले इनकी चोंच छोटी होती है। इनके और डॉल्फिन के दांतों में भी अंतर होता है। इनका आकार भी डॉल्फिन के मुकाबले छोटा होता है।

दुनिया में सुइंस या पॉरपॉइज की छह नस्लें पाई जाती हैं। वैक्विटा पॉरपॉइज इनमें से सबसे छोटी होती है। इनके तेजी से खात्मे की सबसे बड़ी वजह है, रिहाइशी इलाकों में बड़े पैमाने पर मछलियों के पकड़ने का कारोबार।

जाल में फंसकर चली जाती है जान

- फोटो : BBC
होता ये है कि ये अक्सर मछली पकड़ने के जाल में फंसकर अपनी जान गंवा देती हैं। जिस इलाके में वैक्विटा पॉरपॉइज पाई जाती हैं वहां पर मछलियां पकड़ने का काम जोर-शोर से होता है।

मछलियों को पकड़ने के लिए जिलनेट नाम के जाल का गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल होते हैं। इन्हीं जालों की वजह से चीन की यांग्त्जी नदी से डॉल्फिन का खात्मा हो गया। आज यही खतरा वैक्विटा पॉरपॉइज पर मंडरा रहा है।

ये सुइंस, समंदर में तेज आवाजें निकालती हैं। आज इनकी आवाज की रिकॉर्डिंग करके इनकी तादाद का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
मेक्सिको के अमांडो यारामिलो लेगोरेटा काफी दिनों से इस काम में लगे हैं।

उन्होंने 2011 से 2015 के बीच अपने साथियों की मदद से समंदर में इन वैक्विटा पॉरपॉइज की निगरानी की। इनकी आवाज की रफ्तार इतनी तेज होती है कि इंसान के कान उसे सुन नहीं सकते।

खास मशीनों से रिकॉर्ड होती है इनकी आवाज

- फोटो : BBC
इन सुइंस की आवाज को मशीन के जरिए रिकॉर्ड किया जाता है। फिर उन्हीं आंकड़ों की मदद से कैलिफोर्निया की खाड़ी में सुइंस की तादाद का अंदाजा लगाया जाता है।

लेगोरेटा का कहना है कि पिछले चार सालों में इन सुइंस की आवाज में 34 फीसद की गिरावट आई है। लेगोरेटा के अलावा भी एक और पड़ताल से पता चला है कि इनकी तादाद महज पचास ही रह गई है।

अगर वैक्विटा पॉरपॉइज की इस नस्ल का खात्मा होता है, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे, क्योंकि आज की तारीख में इनके बचाव के लिए मछली मारने वालों को आर्थिक मदद मिलती है।

वैक्विटा पॉरपॉइज के खात्मे के बाद उन्हें ये पैसे नहीं मिलेंगे। वो और ज्यादा तादाद में मछलियां पकड़ने की कोशिश करेंगे।

मछलियों के खात्मे का है डर

- फोटो : BBC
इससे पूरे इलाके से ही मछलियों का खात्मा होने का डर है। मेक्सिको के योर्ग टॉर इन वैक्विटा पॉरपॉइज को बचाने की मुहिम से जुड़े हुए हैं। वो कहते हैं कि प्रशासन इन सुइंस के खात्मे के लिए करीब पंद्रह सौ मछुआरों को बार-बार जिम्मेदार बताता है।

इससे वो लोग भी खीझ गए हैं। योर्ग सलाह देते हैं कि मेक्सिको की सरकार को वैक्विटा पॉरपॉइज को बचाने के लिए देशव्यापी मुहिम छेड़नी चाहिए। इसे देश की पहचान का मसला बताना चाहिए। तभी आम लोग, इस मुहिम को लेकर संजीदा होंगे।

मेक्सिको के राष्ट्रपति ने 2015 में वैक्विटा पॉरपॉइज को बचाने के लिए एक इमरजेंसी अभियान का एलान किया है। पिछले साल से ही मछलियां पकड़ने के लिए जिलनेट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।
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सरकार कर रही मछुआरों के नुकसान की भरपाई

- फोटो : BBC
इससे मछुआरों को होने वाले नुकसान की भरपायी के लिए सरकार पैसे दे रही है। हवाई सर्वे से पता चला है कि अमरीका की कोलोराडो नदी के डेल्टा में कुछ और सुइंस पायी गई है।

अब अगर सरकार की मुहिम रंग लाती है तो इस इलाके में वैक्विटा पॉरपॉइज की तादाद बढ़ने की उम्मीद है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि जिलनेट का इस्तेमाल पूरी तरह बंद हो। हालांकि सिर्फ वैक्विटा पॉरपॉइज से पूरी नस्ल को बचा पाना बहुत मुश्किल काम है।
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