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चीन को जवाब देने के लिए मिसाइलें बना रहा ताइवान, तनाव बढ़ने के आसार

Sat, 18 Aug 2018 07:25 PM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला
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चीन द्वारा लगातार आधुनिक हथियारों का विकास करके न सिर्फ अमेरिका बल्कि पड़ोसी देशों और दक्षिण चीन सागर में तनाव खड़ा किया जा रहा है। इसके जवाब में ताइवान भी मिसाइलों और मिसाइल इंटरसेप्टरों का विकास करने में जुट चुका है। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव तो बढ़ सकता है लेकिन दक्षिण चीन सागर में स्व-शासित द्वीप पर बीजिंग का सैन्य प्रभाव कुछ हल्का पड़ सकता है। 

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रक्षा विशेषज्ञों ने ताइवान के ताजा मिसाइल विकास कार्यक्रम की पुष्टि के बाद यह जानकारी दी है। विश्लेषकों ने कहा कि ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन के वर्ष 2016 में कार्यभार संभालने के बाद से ताइवान ने एक नई मिसाइल विकसित की है। 

इस दौरान ताइवान ने अपनी एक मिसाइल में कुछ सुधार भी किया है, जबकि तीसरी मिसाइल का विकास भी तेज गति से किया जा रहा है। क्षेत्र में हथियारों की बढ़ती होड़ यह दिखाती है कि चीन के सैन्य विस्तार से निपटने की कोशिश इस पूरे इलाके में सैन्य संघर्ष की आशंका को किस तरह बढ़ा रही है।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्व-शासित द्वीप की आजादी की वकालत करने वाले देशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए युद्धपोत, बमवर्षक और लड़ाकू विमानों को प्रशिक्षण मिशन पर भेजा है। यह सभी सैन्य परिवहन खतरनाक हथियारों से लैस हैं और विवादित द्वीप के आसपास चक्कर लगा रहे हैं। 

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ताइवान को लेकर चीन जताता रहा है विरोध

ताइवान में तमकांग विश्वविद्यालय के रणनीतिक अध्ययन प्रोफेसर अलेक्जेंडर हुआंग के मुताबिक जहां एक ओर बीजिंग सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है वहीं दूसरी ओर ताइवान अपनी मिसाइल प्रणाली को लगातार मजबूत कर रहा है। 

यह भी खुफिया सूचना है कि ताइवान को हथियारों की ताकत देने में अमेरिका अपनी भूमिका निभा रहा है। चीन ने इसी आशंका से अमेरिका और ताइवान की दोस्ती पर सवाल उठाया है।
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