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सीरिया: बागियों के 'गढ़' पर फौज ने बोला धावा

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सीरिया के सरकारी टीवी चैनल ने कहा है कि विद्रोहियों के प्रभाव वाले कैसर कस्बे को सुरक्षा बल चारों तरफ से घेर कर हमले कर रहे हैं।
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लेबनानी की सीमा के नजदीक स्थित इस कस्बे में हफ्तों से लड़ाई हो रही है।

विद्रोही गुटों का कहना है कि लेबनान के हिजबुल्ला संगठन के चरमपंथी सरकारी बलों के साथ लड़ रहे हैं।

संवाददाताओं का कहना है कि दोनों पक्षों के लिए कैसर का रणनीतिक महत्व है। अगर सरकार इस पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर लेती है, तो यह राजधानी से समुद्री तट तक पहुंच सुनिश्चित करेगा।

बेरूत में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम मुइर का कहना है कि विद्रोहियों के लिए इस शहर पर नियंत्रण का मतलब होगा कि उनका पड़ोसी देश लेबनान में आना-जाना आसान हो जाएगा।
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कब्जे की लड़ाई
सीरिया के विपक्षी कार्यकर्ताओं का कहना है कि कैसर में सरकारी हवाई हमले और बमबारी में करीब 30 लोगों की मौत हुई है। इनमें 16 विद्रोही लड़ाके शामिल हैं।

एस सैन्य सूत्र के हवाले से समाचार एजेंसी एएफपी ने खबर दी है कि सरकारी बलों ने कस्बे के मुख्य चौराहे और टाउन हाल पर कब्जा कर लिया है, इस बात की अभी स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है।

दोनों पक्षों ने कहा है कि शहर के आसपास भीषण लड़ाई हो रही है, जहां विद्रोही कई हफ़्तों से डेरा डाले हुए हैं। संवाददाताओं के मुताबिक ऐसी खबरें हैं कि लेबनान के सैकड़ों सुन्नी मुसलमान विद्रोहियों की ओर से लड़ रहे हैं।

राष्ट्रपति असद की ओर से चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के बयान के बाद क़ैसर पर हमले की खबर आई है।

अमेरिका और रूस के शांति सम्मेलन के आयोजन की घोषणा के बाद पहली बार अर्जेंटीना के एक अखबार को दिए साक्षात्कार में असद ने कहा है कि बैठक चरमपंथियों को धन और हथियारों की आपूर्ति बंद करने पर केंद्रित होनी चाहिए।

इस्तीफे की अपीलों को खारिज करते हुए असद ने कहा कि एक कप्तान कभी अपने जहाज को नहीं छोड़ता है। अगले साल होने वाला राष्ट्रपति चुनाव उनका भविष्य तय करेगा।

इस साल जून में प्रस्तावित शांति सम्मेलन में सीरिया सरकार और विद्रोहियों के बीच एक समझौते और दोनों पक्षों को तत्काल हिंसा रोकने पर सहमत करने की कोशिश की जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव
यह योजना संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव पर आधारित है, इसमें राष्ट्रपति असद और विपक्ष की भागीदारी वाली एक अंतरिम सरकार बनाने का प्रस्ताव है।

हालांकि अभी तक बैठक में शामिल होने की सहमति न तो सीरियाई सरकार ने दी है और न विपक्ष ने।

इस बीच सीरिया में मिसाइल भेजने के रूस के फ़ैसले को एक शीर्ष अमेरिकी जनरल ने 'बेवक्त और दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है।

अमेरिकी सेना प्रमुख जनरल मार्टिन डेंपसी ने कहा कि यह फैसला सरकार को साहस देगा और दर्द को और बढ़ाएगा।

मिसाइल भेजने की पुष्टि किए बिना रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि सीरिया को मिसाइल भेजने से किसी अंतरराष्ट्रीय नियम का उल्लंघन नहीं होता है। रूस राष्ट्रपति असद का एक प्रमुख सहयोगी माना जाता है।
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पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि सीरिया में मार्च 2011 से जारी लड़ाई में अब तक दोनों पक्षों के करीब 80 हजार लोग मारे गए हैं। वहीं विपक्षी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह संख्या एक लाख 20 हजार तक हो सकती है।
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