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एक दवा जो आईएस आतंकियों को बना देती है हैवान

Sat, 21 Nov 2015 01:47 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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एक ओर सीरिया आईएस और वहां विद्रोहियों के आंतक से जूझ रहा है दूसरी ओर छोटी सी दवा की गोली ने भी उसे परेशान कर रखा है। आप यह जान कर चौंक जाएंगे कि एक सीरिया में विद्रोहियों के हाथ में एक ऐसी दवा पहुंच चुकी है जिसका उपयोग कर के वो और भी बेरहम हो गए हैं।
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अखबार द गार्डियन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, कैप्टागॉन नाम की इस दवा का असर बहुत घातक है। इसकी मदद से आतंकी कई रातें बिना सोए जंग लड़ रहे हैं और इसकी वजह से इनकी संवेदनशीलता भी कम हो गई है।

कैप्टागॉन सीरिया के बाजार से होते हुए पूरे मध्य एशिया में फैल चुकी है। इस रिपोर्ट की मानें तो इस दवा के जरिए कई अरब रुपयों का कारोबार भी किया जा रहा है। इस दवा की कालाबाजारी की मदद से इकट्ठा किए गए पैसों से हथियार भी खरीदे जा रहे हैं। (तस्वीर- The Washington Post से साभार)
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खतरनाक तरीके से बढ़ती है क्षमता

यूएन ऑफिस ऑन ड्रग्स और क्राइम (UNDOC) के प्रतिनिधि के मसूद करीमीपुर ने वॉयस ऑफ अमेरिका को बताया कि 'सीरिया बड़ी मुसीबत के दौर से गुजर रहा है। उसकी सीमाएं बेकार हो चुकी हैं। यहां हथियारों से लेकर पैसे और ड्रग्स के साथ-साथ हर तरह की तस्करी हो रही है। उनके मुताबिक वहां क्या बनाया जा रहा है, क्यों बनाया जा रहा है और इसे कौन बना रहा है इसकी जानकारी उनके पास नहीं है।'

कैप्टागॉन के बारे में यह भी बताया जा रहा है कि यह ऐसी दवा है, जो इसे उपयोग करने वाले की क्षमता में खतरनाक तरीके से इजाफा करती है।

इसका उपयोग करने के बाद कोई भी कितने भी दिनों तक जाग सकता है। इसका उपयोग करने के बाद आदमी किसी को भी बेरहमी से मार भी सकता है। (तस्वीर साभार- The Guardian)
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नींद के बारे में भूल जाइए

बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री में इस दवा का उपयोग करने वाले एक शख्स ने बताया है कि इस दवा का उपयोग करने के बाद अगर आप आंख बंद कर भी लें तो भी आप सो नहीं सकते। इसे खाने के बाद आपको नींद के बारे में भूल जाना चाहिए।

दूसरे उपयोगी ने बताया कि इस दवा को खाने के बाद उसे लगा कि उसमें दुनिया भर की ताकत है। उसके मुताबिक इसका अहसास बहुत ही बेहतर है।

बताते चले कि कैप्टागॉन नाम की दवा पश्चिमी मुल्कों में 1960 के बाद से ही मौजूद है। इसे उन लोगों को दिया जाता था जो डिप्रेशन के शिकार थे, किंतु अमेरिका में इसके उपयोग करने पर रोक लगा दी गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बीते चार साल में इस दवा को सबसे ज्यादा सऊदी अरब खरीद रहा है।
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