बता दें कि सिरिसेना ने पिछले महीने अचानक रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त करते हुए पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे को नया प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया था। राष्ट्रपति ने संसद को भी 14 नवंबर तक के लिए भंग कर दिया था। हालांकि विक्रमसिंघे संविधान के तहत राष्ट्रपति के पास इसका अधिकार नहीं होने के चलते बर्खास्तगी को अवैध बताते हुए संसद में फ्लोर टेस्ट कराने की मांग कर रहे थे।
तभी से देश में सियासी संकट चल रहा था। सोमवार को संसद के स्पीकर कारू जयसूर्या ने कहा था कि प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे को असंवैधानिक तरीके से बर्खास्त किया गया है और वह राजपक्षे को फ्लोर टेस्ट में बहुमत सिद्ध करने से पहले नए प्रधानमंत्री के तौर पर मान्यता नहीं देंगे। उन्होंने14 नवंबर को फ्लोर टेस्ट के लिए संसद का सत्र बुलाए जाने की मांग सिरिसेना से की थी।
इस बीच, यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने श्रीलंका में मौजूदा संकट को खत्म करने की मांग की है। ईयू से पहले अमेरिका और भारत समेत कई मुल्कों ने श्रीलंका में दो सप्ताह से जारी संकट पर चिंता जता चुके हैं। शुक्रवार को ईयू ने कहा कि दुनिया में श्रीलंका की एक पहचान और उसकी साख है। श्रीलंका के मौजूदा हालात का विदेशी निवेश पर पड़ेगा। इसलिए मौजूदा राजनीतिक संकट जल्द से जल्द समाप्त होना चाहिए।