फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्रीलंकाः संसद भंग किए जाने पर सिरीसेना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कई राजनीतिक दल

Mon, 12 Nov 2018 07:23 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
मैत्रीपाला सिरीसेना
विज्ञापन

श्रीलंका की मुख्य पार्टियों ने सोमवार को राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना द्वारा संसद भंग किए जाने को चुनौती देने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संसद में पूर्ण बहुमत प्राप्त तीन पार्टियों के समूह ने उच्च न्यायालय से कहा है कि वह प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को पद से हटाने के सिरीसेना के 26 अक्तूबर के फैसले को अवैध करार दिया जाए। याचिकाकर्ताओं में चुनाव आयोग के सदस्य प्रोफेसर रत्नाजीवन होल भी शामिल हैं।

विज्ञापन


श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने 26 अक्तूबर को प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया था। लेकिन, बीते शुक्रवार को जब राजपक्षे की पार्टी ने बहुमत न जुटा पाने की बात कही तो राष्ट्रपति ने संसद को भंग कर पांच जनवरी को मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा कर दी। गौरतलब है कि कई राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी समूहों ने सिरिसेना के फैसले की आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक और गैरकानूनी बताया था। 

इसी बीच श्रीलंका की मौजूदा स्थिति को अमेरिका के एक बड़े एक्सपर्ट ने बहुत खराब बताया है। अटलांटिक काउंसिल थिंक टैंक के दक्षिण एशिया सेंटर के निदेशक भारत गोपालस्वामी ने कहा, ‘श्रीलंका में संसद की बर्खास्तगी का फैसला गलत था और इससे यही साबित होता है कि सिरीसेना ने एक खास पार्टी को फायदा पहुँचाने के लिए संसद में अपने शक्ति का गलत इस्तेमाल किया।
विज्ञापन


उन्होंने कहा, ‘विक्रमसिंघे को उनके पद से हटाने का फैसला गलत था। अब अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के बीच श्रीलंका में लोकतंत्र को लेकर फिर से भरोसा कायम करने के लिए वहां निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव होना बहुत महत्वपूर्ण है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें