श्रीलंका ने एक समझौते के तहत हंबनटोटा के सामरिक दक्षिणी बंदरगाह को शनिवार को औपचारिक रूप से 99 साल की लीज पर चीन को सौंप दिया। विपक्ष ने इस समझौते को बिक्री करार दिया है।
अधिकारियों ने बताया कि चीन मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग्स कंपनी के स्वामित्व वाली दो कंपनियां और श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी के पास इस बंदरगाह का स्वामित्व होगा। यह दोनों ही इस क्षेत्र में निवेश का काम देखेंगी। श्रीलंका सरकार ने इस साल जुलाई में हंबनटोटा बंदरगाह में 70 फीसदी हिस्सेदारी को चीन के हाथों 1.1 अरब डॉलर में बेचने का समझौता किया था।
प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने इस साल अपनी चीन यात्रा के दौरान चीनी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना में हिस्सेदारी में को आपस में बदलने पर सहमति जताई थी। इस परियोजना की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने अपने गृह जिले से की थी।
तत्कालीन वित्त मंत्री रवि करुणानायके ने पिछले साल कहा था कि श्रीलंका ने चीन से आठ अरब डॉलर का कर्ज लिया था। विक्रमसिंघे ने संसद में कहा था, ‘इस समझौते से हमने ऋण को लौटाना शुरू कर दिया है।
हिंद महासागर में हंबनटोटा को एक बड़े बंदरगाह के रूप में परिवर्तित किया जाएगा।’ देश में विपक्ष ने सरकार की तरफ से चीन की कंपनियों के कर में भारी छूट का मुद्दा भी उठाया था। विपक्ष का कहना था कि सरकार ने देश की राष्ट्रीय संपत्ति को चीन के हाथों बेच दिया।