ये पहली बार नहीं है जब दक्षिण कोरिया ने अपनी ओर से किए जा रहे प्रोपेगैंडा पर रोक लगाई है। कोरियाई युद्ध के बाद से चले आ रहे इस प्रोपेगैंडा का मकसद दूसरे कोरियाई देश के जवानों और लोगों को ये बताना है कि उनका देश उन्हें गुमराह कर रहा है। 2004 में भी दोनों देशों के बीच समझौता होने के बाद ऐसे प्रचार पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन 2015 में दक्षिण कोरिया के दो जवान उत्तर कोरियाई बारूदी सुरंग की चपेट में आकर मर गए जिसके बाद दक्षिण कोरिया ने लाउडस्पीकर वापस चालू कर दिए। उसी साल एक बार फिर इन पर रोक लगाई गई, लेकिन 2016 में उत्तर कोरिया के एक हाइड्रोजन बम का परीक्षण करने के बाद उन्हें फिर शुरू कर दिया गया। इस बार भी दक्षिण कोरिया ने साफ नहीं किया है कि इस मुलाकात के बाद लाउडस्पीकर वापस चालू कर दिए जाएंगे या नहीं।
थोड़ा बदला है सूरते हाल?
हाल ही में उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने और एक परीक्षण केंद्र बंद करने का एलान किया था। इसे किम जोंग-उन की दक्षिण कोरिया और अमेरिका के साथ होने वाली बैठकों से जोड़कर देखा जा रहा है। किम जोंग-उन इस शुक्रवार को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन से मिलने वाले हैं। पनमुनजोम के शांति गांव में होने वाली ये मुलाकात दोनों देशों के बीच एक दशक से भी ज्यादा समय में होने वाली पहली मुलाकात होगी। साथ ही जून में किम के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने की भी संभावना है। दोनों नेताओं के बीच ये पहली मुलाकात होगी।