कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रडियो ने कनाडा की संसद में 1914 में भारतीय यात्रियों के जहाज कामागाता मारु को कनाडा की बंदरगाह से वापस लौटाने की घटना पर माफी मांगी है। प्रधानमंत्री के माफी मांगने के बाद स्थानीय सिख समुदाय इस घटना को स्कूलों के सब्जेक्ट में शामिल करने की मांग कर रहा है।
कामागाता मारु जापान का पानी का जहाज था जिसे 1914 में मलेशिया के एक धनी सिख बाबा गुरदित सिंह ने भारतीयों को कनाडा पहुंचाने के लिए किराए पर लिया था। इस जहाज में 376 भारतीय थे जिसमें ज्यादातर सिख थे।
जहाज दो महीने तक कनाडा की वैंकूवर बंदरगाह पर खड़ा रहा, लेकिन उस समय की कनाडा सरकार ने कानून की कई धाराएं बताकर भारतीयों को कनाडा में आने की इजाजत नहीं दी थी। जहाज दो महीने बाद सितंबर 1914 को कोलकाता लौट आया कोलकाता की बंदरगाह पर पहुंचने के बाद अंग्रेज पुलिस ने यात्रियों पर फायरिंग कर दी जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई थी।
इसी घटना को लेकर कनाडा के वर्तमान पर्धानमंत्री ने संसद में माफी मांगी है। वर्ल्ड सिख ऑरगनाइजेशन के अध्यक्ष मुखबीर सिंह ने कहा कि, 'प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रडियो के माफी मांगने का फैसला ऐतिकहासिक है, लेकिन इस घटना को पढ़ाई का भी हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि हमारे कनाडा के नौजवान भेदभाव और नस्लवाद से बच सकें। कामागाता मारु एक महत्वपूर्ण घटना है भेदभाव खत्न करने के लिए हमारे नौजवानों को इसे स्कूलों में पढ़ाया जाना जरूरी है।'