कोलंबिया के राष्ट्रपति ख्वान मैनुएल सांतोस ने एलान किया है कि,'वह, नोबेल पुरस्कार से मिलने वाली रकम को संघर्ष पीडितों की मदद के लिए दान करेंगे।' सांतोस को इस साल का शांति का नोबेल दिया गया है। नोबेल पुरस्कार के रूप में उन्हें नौ लाख 25 हजार डॉलर की राशि दी जाएगी। फार्क विद्रोहियों के साथ बीते महीने किए गए शांति समझौते में उनके प्रयासों के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया है।
फार्क विद्रोहियों और कोलंबिया सरकार के बीच हवाना में चार साल चली वार्ता के बाद बीते महीने स्थायी शांति के लिए समझौता हुआ था। इस समझौते में सांतोस के साथ-साथ फार्क नेता टिमोशेंको का भी अहम योगदान रहा।
हालांकि बाद में कोलंबिया की जनता ने जनमत संग्रह में बेहद कम अंतर से इस समझौते को नकार दिया था। 52 साल पुराने संघर्ष में अब तक दो लाख 60 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 60 लाख से अधिक को अपना घरबार छोडना पडा है।
"आज हमारे पास उम्मीद की वजह है, धरती पर एक युद्ध कम हो गया है।"
कोलंबिया के राष्ट्रपति
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नोबेल पुरस्कार समिति की चेयरवुमेन कासी कूलमन ने कहा, "नॉर्वे की नोबेल समिति ने 2016 का शांति का नोबेल पुरस्कार कोलंबिया के राष्ट्रपति ख्वान मैनुएल सांतोस को देश के पचास साल से ज्यादा पुराने गृह युद्ध को समाप्त करने के लिए किए गए प्रयासों के लिए देने का फैसला किया है।"सांतोस ने जनमत संग्रह में समझौते के खारिज होने के बाद विद्रोहियों से वार्ता जारी रखने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की है।
कोलंबिया के राष्ट्रपति ख्वान मैनुएल सांतोस ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में कहा था, "आज हमारे पास उम्मीद की वजह है, धरती पर एक युद्ध कम हो गया है।" सांतोस दरअसल कोलंबिया के वामपंथी फार्क विद्रोहियों और सरकार के बीच हो रहे शांति समझौते का हवाला दे रहे थे। ये समझौता पाँच दशक से अधिक से जारी और दो लाख साठ हजार से अधिक लोगों की जान लेने वाले गृह युद्ध पर विराम लगाने जा रहा था।
2016 में चार साल चली औपचारिक और उससे पहले दो साल चली गुप्त वार्ता के बाद कोलंबिया की सरकार और विद्रोहियों ने शांति समझौते पर सहमत होने का एलान किया था। कोलंबिया के तटीय शहर कार्टेगाना में फार्क विद्रोहियों और कोलंबिया सरकार के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।