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रिपोर्ट में खुलासा, इन देशों में किशोरियां खुद पर हिंसा को मानती हैं सही

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यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड की एक रिपोर्ट के अनुसार आधे से अधिक किशोरियां किन्हीं न किन्हीं कारणों से घरेलू हिंसा को सही मानती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 19 वर्षीय लड़कियों का मानना है कि यदि कोई महिला संभोग से इंकार करने पर उसके साथ हिंसा एक बड़ा कारण है।
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वहीं इसी उम्र की 30 प्रतिशत से ज्यादा लड़कियों का मानना है कि वो पहले से शारीरिक और यौन हिंसा का शिकार हो चुकी हैं। रिपोर्ट में कंबोडिया, भारत, बंग्लादेश और नेपाल के आंकड़े भी शामिल किए गए हैं और वहां की लड़कियों की यही धारणा है।

रिपोर्ट की माने तो 25 से 51 फीसदी लड़कियों का मानना है कि पत्नियों का पीटा जाना सही है। इस रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि अल्प शिक्षा, बेरोजगारी और घर में भी हिंसा की स्वीकार्यता इस सोच की अहम वजहें हैं।
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पाकिस्तान में किशोरियां एचआईवी से संक्रमित

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जहां 10 से 19 साल की किशोरियां एचआईवी से संक्रमित है।

वहीं भारत में 1 लाख 20 हजार, इंडोनेशिया में 46 हजार, थाईलैंड में 11 हजार, म्यांमार में 7,700, कंबोडिया में 3,500 ईरान में 3,200, वियतनाम में 2,600 और नेपाल में 1,200 लोग एचआईवी से ग्रसित है।

इन सब के बीच जब बात आती है यौन स्वास्थ्य के बारे में जागरुकता कि तो केवल 15 से 24 वर्ष के पाकिस्तानी युवाओं में केवल 28 प्रतिशत को ही जागरुक हैं और 15 से 24 साल की  आधे से अधिक युवतियों को यह नहीं पता है कि कॉंडोम उन्हें एचआईवी से कैसे बचा सकता है। (तस्वीरें United Nations Population Fund (UNFPA) की रिपोर्ट से साभार)
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