पश्चिमी रूस के कालीनिनग्राड शहर में लगे टॉयलेट के एक विज्ञापन को नस्लीय करार देते हुए मामले ने तूल पकड़ लिया है।
इस विज्ञापन में टॉयलेट की सीट के सामने एक महिला को साड़ी पहने श्वेत साथी के इंतजार में बैठे दिखाया गया है।
हालांकि विषय की गंभीरता को देखते हुए मामले की आधिकारिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
इस विज्ञापन में एक महिला को टॉयलेट की सीट के सामने भारतीय साड़ी पहने बैठे हुए दिखाया गया है। इस विज्ञापन का शीर्षक है, "मैं एक श्वेत साथी के इंतजार में हूं"
"विज्ञापन की शब्दावली केवल काले लोगों और जातीय अल्पसंख्यकों को ही नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद और नस्लवाद सहन न करने वाले नागरिकों को भी व्यथित करती हैं।"
यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब एक स्थानीय निवासी ने एक सुपर स्टोर के बाहर लगा प्लेकार्ड देखा और उन्होंने अधिकारियों से इस मामले की शिकायत की।
जांच के आदेश
वेबसाइट की एक रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता ने कहा कि इस विज्ञापन की शब्दावली न केवल काले लोगों और जातीय अल्पसंख्यकों को ही, बल्कि राष्ट्रवाद और नस्लवाद सहन न करने वाले नागरिकों को भी व्यथित करती है।
दूसरी ओर, रूस की राज्य विज्ञापन नियंत्रक संघीय एकाधिकार रोधी सर्विस ने कहा कि वह इस मामले की जांच करेगी कि कहीं इस विज्ञापन के प्रमोशन में किसी तरह के क़ानून का उल्लंघन तो नहीं किया गया है।
इसके लिए एजेंसी ने स्थानीय लोगों से अपील की है। उसका लोगों से कहना है कि वे बताएं की क्या उन्हें इस विज्ञापन में कुछ अपमानजनक लगा है?
इस बीच कालीनिनग्राड.रू न्यूज वेबसाइट की ओर से कराए गए सर्वे में 10 फीसदी से भी कम लोगों ने इस विज्ञापन को नस्लीय क़रार दिया।