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नोबेल पुरस्कारों में लैंगिक असामनता पर फिर उठे सवाल, अब तक 892 बार दिया जा चुका है यह सम्मान

Mon, 01 Oct 2018 02:38 AM IST
स्टावैंगर (नॉर्वे), एपी
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Nobel prize
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नोबेल पुरस्कार दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है, लेकिन पुरस्कार के लिये इस साल के नामों की घोषणाओं ने धुंधले पड़े उन सवालों पर नयी रोशनी डाली है कि आखिर क्यों चंद महिलाएं ही विद्धतजनों की इस जमात का हिस्सा हैं और वह भी खासकर विज्ञान के क्षेत्र में उनकी मौजूदगी नगण्य मात्र क्यों है? शरीर विज्ञान/चिकित्सा विज्ञान के लिए नोबेल पुरस्कार के साथ नोबेल पुरस्कारों की घोषणाएं सोमवार से शुरू होंगी।

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1901 में दिये गये पहले पुरस्कार के साथ अब तक 892 व्यक्तियों को नोबेल पुरस्कार मिला है, लेकिन इनमें महिलाओं की संख्या महज 48 हैं। इनमें से 30 महिलाओं ने या तो साहित्य या फिर शांति के लिए नोबेल पुरस्कार जीता था। इससे भौतिकी, रसायनशास्त्र और शरीरविज्ञान/चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में चौड़ी होती लैंगिक खाई का पता चलता है। इसके अलावा सिर्फ एक महिला ने अर्थशास्त्र के लिये पुरस्कार जीता है, जो तकनीकी रूप से नोबेल पुरस्कार तो नहीं है लेकिन इन पुरस्कारों से संबद्ध जरूर है।

कुछ लैंगिक असमानताओं के लिये ढांचागत कारणों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, मसलन उच्च-स्तरीय विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व। उदारहण के लिये अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स ने कहा है कि 2014 में भौतिकी के सभी प्रोफेसरों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सिर्फ 10 फीसदी था। हालांकि आलोचकों का कहना है कि नामांकन प्रक्रिया में लैंगिक पूर्वाग्रह गहरे तक पैठ बनाये हुए है।
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विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में करियर बनाने के लिये लड़कियों और युवतियों को प्रोत्साहित करने वाले ब्रितानी समूह स्टेमेट्स की प्रमुख एनी-मैरी इमाफिडोन ने कहा कि समस्या समूची नामांकन प्रक्रिया है।

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