चीन में एक कानून बना है जिसके तहत व्यस्क बच्चों का अपने उम्रदराज माता पिता से नियमित रूप से मिलना जरूरी होगा और अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो माता पिता उनके खिलाफ मुकदमा कर सकते हैं।
इस कानून में ये नहीं बताया गया है कि इस तरह की मुलाकातें कितने-कितने समय बाद होनी जरूरी हैं, लेकिन ये चेतावनी जरूर दी है कि इनकी अनदेखी करने पर अदालती कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
खबरों के अनुसार ऐसे बुजुर्ग लोगों की संख्या से तेजी से बढ़ रही जिन्हें उन्हें संतानों ने छोड़ दिया है।
इसी महीने चीन के सरकारी मीडिया की खबरों में कहा गया कि 90 साल की उम्र को पार कर चुकी एक महिला को उसके बेटे दो वर्षों तक सूअरों के बाड़े में रहने को मजबूर किया।
बूढ़ा होता चीन
चीनी अखबार ऐसी खबरों से भरे पड़े हैं जब बच्चे अपने माता पिता की संपत्ति कब्जा लेते हैं या फिर बूढ़े लोग अपने घरों में बिना देखभाल के ही मर जाते हैं।
चीन में हो रही तेज रफ्तार विकास एक साथ रहने की पारंपरिक अवधारणा पर चोट कर रहा है। चीन में कुल आबादी का आठवां हिस्सा 60 वर्ष की उम्र को पार कर चुका है और इनमें से आधे लोग अकेले रह रहे हैं।
बच्चे अकसर बड़े औद्योगिक शहरों में काम करने के लिए अपने माता पिता का घर छोड़ देते हैं। ये समस्या चीन में एक बच्चे की नीति और जीवन प्रत्याशा में हुई वृद्धि के कारण भी बढ़ी है।
चीन में 60 वर्ष की उम्र पार करने वाले लोगों की संख्या लगभग 16.7 करोड़ है जबकि 80 साल की उम्र की छू चुके लोग दस लाख के आसपास हैं।
ऐसी कामकाजी संतानों की संख्या बहुत कम है जो अपने बुजुर्ग माता पिता को सहारा दे रहे हैं। बुजुर्ग लोगों के लिए सेवानिवृत्ति या देखभाल केंद्रों से जुड़े विकल्प भी सीमित ही हैं।