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सेल ट्रांसप्लांट का कमाल, आदमी फिर पैरों पर

Fri, 24 Oct 2014 08:13 AM IST
फर्ग्यूस वॉल्श चिकित्सा संवाददाता/बीबीसी न्यूज़
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पोलैंड में एक लकवाग्रस्त आदमी, जिसके चलने-फिरने की बीते चार साल से कोई उम्मीद नहीं थी, फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो गया है। उनके इलाज को चिकित्सा जगत बड़ी उम्मीद से देख रहा है।
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डेरेक फिडयका के 'स्पाइनल कॉर्ड' की कोशिकाओं को 'ट्रांसप्लांट' कर उन्हें फिर से चलने-फिरने लायक बनाया गया है।

यह अपने तरह का दुनिया का पहला ऑपरेशन है, जिसे पोलैंड के चिकित्सकों ने लंदन के चिकित्सकों की मदद से पूरा किया। इलाज की लंबी प्रक्रिया के दौरान बीबीसी की पैनोरमा टीम को मरीज पर एक साल तक नज़़र रखने का मौका मिला।

इस इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी 'सेल ट्रांसप्लांटेशन जर्नल' में प्रकाशित हुई है। इलाज के बाद एक फ्रेम की मदद से चलने फिरने में कामयाब होने के बाद डेरेक फिडयका ने बीबीसी से कहा, "विश्वास नहीं हो रहा है। जब आप अपने आधे शरीर को महसूस नहीं कर पाते हैं तब आप खुद को असहाय पाते हैं।"
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मिला नया जीवन
फिडयका का इलाज करने वाले दल का नेतृत्व इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजी के न्यूरल रिजेनेरेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर ज्यॉफ रेज़मैन कर रहे हैं। उन्होंने इस कामयाबी पर कहा, "यह उपलब्धि चांद पर इंसान के चलने की उपलब्धि से बड़ी कामयाबी है।"

40 साल के फिडयका 2010 में एक हमले के शिकार हुए थे। उनकी पीठ पर किसी ने लगातार चाकू से वार किया, जिसके चलते वे लकवाग्रस्त हो गए।

इलाज शुरू होने से पहले पूरे दो साल तक फिडयका लकवाग्रस्त रहे। इस दौरान उन्होंने लगातार फिजियोथेरेपी के ज़रिए अपना इलाज जारी रखा, लेकिन उन्हें कोई फ़ायदा नहीं हुआ। लेकिन दो साल तक चले इलाज ने उनकी ज़िंदगी बदल दी।
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