पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अब्बासी के आकस्मिक नेपाल आगमन को कूटनीतिक वृत्त विशेष महत्व के साथ देख रहा है। सूत्रों की मानें तो यह नेपाल के प्रधानमंत्री ओली का भारत के विषय में विशेष रणनीतिक रुख है। वो पड़ोसियों के बीच नेपाल की सौदेबाजी की क्षमता बढ़ा कर देश विकास के लिए अधिकतम फायदा लेना चाहते हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भ्रमण के कुछ ही दिनों बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का स्वागत करना एक प्रकार से भारत को दिया गया ‘चेक एंड बैलेंस’ है।
बहुमत से सत्ता में वापस लौटे ओली फिलहाल कोई भी भारतीय कार्ड को छोड़ना नहीं चाहते हैं । प्रधानमंत्री बनने के बाद पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के रूप में अब्बासी का स्वागत करके ओली ने अपने वामपंथी वोटर को स्पष्ट करने का प्रयास किया कि वो भारत परस्त नही हैं। इस भ्रमण को भारत को दबाव में रखने का और चीन को खुश करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा सकता है ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ओली को जीत की शुभकामना देने पर उन्होंने मोदी को नेपाल आने का न्यौता दिया था। लेकिन इससे पहले ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री द्वारा नेपाल के आकस्मिक भ्रमण का विशेष अर्थ है। ओली का यह कदम चीन और भारत से अधिकतम फायदा लेने की दिशा में किया गया एक प्रयास है। नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (एमाले) के एक नेता ने कहा कि वो देश के उन्नति के लिए नेपाल और नेपाली के हित में निर्णय ले रहे हैं।