घायल होने के बाद भी अपने काम में मशगूल समाचार एजेंसी रायटर्स के फोटो पत्रकार ग्लेब गार्निक
मुश्किल और विपरीत परिस्थियों में भी सच्चाई की बागडोर को हाथ में थामें तमाम खबरों से दुनिया को रूबरू कराने वाले पत्रकार की प्रत्येक साढ़े चार दिनों में हत्या कर दी जाती है। पत्रकारों को लेकर यूनेस्को ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है।
यूनेस्को के महासचिव की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दशक 827 पत्रकारों की उनकी नौकरी के दौरान हत्या कर दी गई। पत्रकारों की समस्या को लेकर सबसे ज्यादा प्रभावित सीरिया, यमन, लीबिया, जैसे अरब देश रहे हैं। अरब देशों के बाद लैटिन अमेरिका का नंबर आता है। आश्चर्यजनक रूप से पत्रकारों की ज्यादातर (लगभग 59 प्रतिशत) मौतें पिछले दो सालों में युद्ध प्रभावित देशों में हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी पत्रकारों की अपेक्षा स्थानीय पत्रकारों पर मौत का खतरा ज्यादा मंडराता रहता है। आंकड़ों के अनुसार मारे गए पत्रकारों में 90 प्रतिशत स्थानीय पत्रकार थे। हालांकि 2014 में 17 विदेशी पत्रकार मारे गए जो कि औसतन पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक था।