उत्तर कोरिया में सरकार ने आम लोगों के लिए विदेशी फिल्मों को प्रतिबंधित किया हुआ है। विदेशी फिल्में देखने पर कड़ी सज़ा का प्रावधान है। लेकिन इसी उत्तर कोरिया से एक शख्स निकलते हैं जो जेम्स बॉन्ड के दीवाने थे और इसके लिए उन्होंने मुल्क छोड़ने से भी गुरेज नहीं की। ये कहानी हक मिन किम की है जिन्होंने इस शौक के चलते तीन बार गिरफ्तारी के साथ उत्पीड़न झेला और आखिर में अपना देश भी छोड़ दिया।
बचपन में ही दिखी प्रतिभा
इलेक्ट्रॉनिक सामानों के पुर्जों से खेलने वाले किम बचपन से ही अपने पड़ोसियों के बीच फेमस थे क्योंकि उन्होंने उनके सामानों को ठीक करना शुरू कर दिया था। किम बताते हैं, "मेरी मां मुझे देखकर बहुत खुश होती थीं और इसी ने मुझे काफी प्रेरित किया। मेरे मां-पापा के दोस्त घर आते थे और मुझे देखकर चौंक जाते थे कि इतना छोटा सा बच्चा इतनी चीजें कैसे ठीक कर लेता है।"
पढ़ें:- अमेरिकी नागरिक नहीं जा सकेंगे उत्तर कोरिया, यूएस ने लगाया बैन
किम थोड़े बड़े हुए तो उनके पड़ोसी अपनी खराब घड़ियां, कंप्यूटर, फ़्रिज और वॉशिंग मशीनों को लाने लगे। लेकिन जब कई लोग अपने वीएचएस (वीडियो होम सिस्टम) ठीक कराने के लिए लाने लगे तब किम की दिलचस्पी विदेशी फिल्मों और टीवी शो में पैदा हुई।
उत्तर कोरिया में विदेशी मीडिया देखना प्रतिबंधित
किम कहते हैं, "उत्तर कोरिया में विदेशी मीडिया को देखना प्रतिबंधित है। हालांकि, चीनी टीवी से सिग्नल आना संभव है।" "एक बार सरकारी इंजीनियरों ने हमारे घरों में आकर टेलीविजन सेट्स को रिपेयर कर दिया ताकि हम सिर्फ़ एक चैनल देख सकें लेकिन मैं भी इंजीनियरिंग जानता था और मैंने अपनी टीवी को पहले जैसा कर लिया।"
भूख में साथ था जेम्स बॉन्ड, उत्तर कोरिया नहीं
नॉर्थ कोरिया, जेम्स बॉन्ड
हक मिन किम की विदेशी फिल्मों और मीडिया में दिलचस्पी साल 1995 से 1998 के बीच बढ़ी। ये वो समय था जब उत्तर कोरिया भुख़मरी से जूझ रहा था। लेकिन विदेशी फिल्मों और टेलीविज़न ने किम को भुखमरी की भयावहता से बचा लिया।
छुप-छुपकर देखा करता था टीवी
किम बताते हैं, "मुझे याद है कि मैं उस दौर में छुप-छुपकर टीवी देखा करता था। मुझे बहुत ज़्यादा भूख़ लगती थी लेकिन मैं जैसे ही टीवी सीरियल देखना शुरू करता था तो मुझे लगता था कि जैसे मैं स्वर्ग में हूं।"
उन्होंने बताया, "मुझे याद है मेरी पूरी जिंदगी में हमारे घर में कभी भी पर्याप्त खाना नहीं रहा लेकिन मेरे लिए खुशी की सबसे बड़ी बात ये थी कि मैं अपनी टीवी के सामने बैठकर विदेशी फिल्में देख सकूं।" किम को जेम्स बॉन्ड की फिल्में बेहद पसंद थी। वह बॉन्ड की फिल्मों में दिखाई गई शानदार घड़ियों और बंदूकों के दीवाने थे जिनसे एक पल में दीवार में छेद करना संभव था।
जब तीन बार हुई गिरफ्तारी
नॉर्थ कोरिया, जेम्स बॉन्ड
हक निम किम पर फिल्मों की दीवानगी का आलम कुछ यूं था कि वे जब भी कुछ अच्छा देखते तो उन्हें अपने दोस्तों के साथ साझा करने से खुद को रोक नहीं पाते। किम बताते हैं, "जब भी मैं कुछ अच्छा देखता था तो मैं उसे अपने दोस्तों के साथ साझा करना चाहता था। कुछ दोस्तों ने मांगना शुरू किया तो मैंने फिल्मों को यूएसबी स्टिक में देना शुरू कर दिया।"
अवैध सामान बांटने का आरोप
एक बार की बात है हक निम किम अपने दोस्त के घर पर उसके परिवार के साथ फिल्म देख रहे थे तभी एक सरकारी अधिकारी वहां पहुंच गया। डिवाइस को जब्त करने के बाद अधिकारी ने पूछा कि ये डिवाइस किसकी हैं। किम ने इन डिवाइसों को अपना बताया। इस मौके पर किम सिर्फ 17 साल के थे। इसलिए, उन्हें जाने दिया गया। लेकिन इसके बाद किम को दो बार और गिरफ्तार किया गया। तीसरी बार गिरफ्तार किए जाने पर उनके खिलाफ अवैध सामान बांटने का आरोप लगाया गया। उन्हें उत्पीड़न सहना पड़ा। उनके एक दोस्त की जेल में ही मौत हो गई।
किम बताते हैं, "मुझे बताया गया कि मेरा जुर्म गंभीर है और इसके लिए मुझे उम्र कैद हो सकती है लेकिन मेरे कस्बे के लोगों के दवाब के चलते मुझे छोड़ दिया गया। इस समय किम की उम्र मात्र 24 साल की थी और उन्होंने उत्तर कोरिया को छोड़ने का मन बना लिया था। इसके बाद 10 सालों तक योजना बनाने के बाद किम चीन के रास्ते उत्तर कोरिया छोड़कर दक्षिण कोरिया में जाकर बस गए।
जेम्स बॉन्ड से स्टीव जॉब्स
दक्षिण कोरिया पहुंचने के बाद सोगेंग यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हुए किम ने सोगेंग जॉब्स के नाम से आईफ़ोन और आईपैड ठीक करने की दुकान खोली है। किम कहते हैं कि उनकी दुकान के नाम में जॉब्स शब्द स्टीव जॉब्स के सम्मान में लिया गया है।