अमेरिका के विलियम कैंपबेल, जापान के सातोशी ओमुरा और चीन की तू यूयू को सोमवार को चिकित्सा क्षेत्र के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। इन तीनों ने विभिन्न परजीवियों के इलाज के लिए नई खोज की है।
स्वीडेन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट स्थित नोबेल असेंबली के अनुसार, इस पुरस्कार में कैंपबेल और ओमुरा की आधी हिस्सेदारी है। इन्होंने गोलकृमि द्वारा होने वाले संक्रमण के इलाज के लिए नई खोज की है। कैंपबेल का जन्म आयरलैंड में हुआ था लेकिन 1962 में वह अमेरिका के नागरिक हो गए थे।
दूसरी तरफ, चीन की तू को मलेरिया के इलाज के लिए नई दवा की खोज के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नोबल असेंबली के अनुसार, कैंपबेल और ओमुरा ने एवरमेक्टिन नाम की दवा इजाद की है जिसके यौगिक के इस्तेमाल से रिवर ब्लाइंडनेस और लिम्फैटिक फाइलेरियासिस की घटनाओं में जबरदस्त कमी आई है। साथ ही, परजीवी आधारित अन्य बीमारियों के फैलने में भी इन दवाओं की क्षमता साबित हुई है।
बीमारियों से लड़ने के लिए नये विकल्पों की खोज
असेंबली ने अपने बयान में कहा है कि 84 वर्षीय तू ने आर्टेमिसिन नाम की दवा खोजी है जिसकी बदौलत मलेरिया से पीड़ित रोगियों की मर्त्यता दर में महत्वपूर्ण रूप से कमी आई है। उनकी यह खोज चीन की पारंपरिक जड़ी-बूटी वाली दवाओं पर आधारित है।
नोबेल समिति ने कहा है कि इन दो खोजों ने प्रति वर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली बीमारियों से लड़ने के लिए नये विकल्पों की खोज की है। इसके परिणामस्वरूप लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होगा और वे ऐसी बीमारियों से अपेक्षाकृत कम पीड़ित होंगे। इस साल चिकित्सा क्षेत्र के वैज्ञानिकों में 9.5 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि वितरित होगी।
इंसान में परजीवी की वजह से होने वाली मलेरिया और फाइलेरिया जैसी बीमारियों से निपटने में क्रांतिकारी दवा खोजने के लिए तीन वैज्ञानिकों को चिकित्सा का नोबेल देने का एलान किया गया है।
अमेरिका के विलियम कैंपबेल, जापान के सातोशी ओमुरा और चीन की तू यूयू ने विभिन्न परजीवियों के इलाज के लिए नई दवाओं की खोज की है। स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट स्थित नोबेल असेंबली के अनुसार, इस पुरस्कार में कैंपबेल और ओमुरा की आधी हिस्सेदारी है।
मलेरिया के लिए आर्टेमिसिन दवा
इन्होंने गोलकृमि द्वारा होने वाले संक्रमण के इलाज के लिए नई खोज की है। नोबेल समिति ने कहा है कि इन दो खोजों ने प्रति वर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली बीमारियों से लडऩे के लिए नये विकल्पों की खोज की है। इसके परिणामस्वरूप लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होगा और वे ऐसी बीमारियों से अपेक्षाकृत कम पीडि़त होंगे। इस साल चिकित्सा क्षेत्र के वैज्ञानिकों में 9.5 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि वितरित होगी।
फाइलेरिया के लिए एवरमेक्टिन दवा
कैंपबेल का जन्म आयरलैंड में हुआ था लेकिन 1962 में वह अमेरिका के नागरिक हो गए थे। नोबेल असेंबली के अनुसार, कैंपबेल और ओमुरा ने एवरमेक्टिन नाम की दवा ईजाद की है जिसके यौगिक के इस्तेमाल से रिवर ब्लाइंडनेस और लिंफैटिक फाइलेरियासिस की घटनाओं में जबरदस्त कमी आई है। साथ ही, परजीवी आधारित अन्य बीमारियों के फैलने में भी इन दवाओं की क्षमता साबित हुई है।
मलेरिया के लिए आर्टेमिसिन दवा
दूसरी तरफ, चीन की यूयू को मलेरिया के इलाज के लिए नई दवा की खोज के लिए इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। असेंबली ने अपने बयान में कहा है कि 84 वर्षीय यूयू ने आर्टेमिसिन नाम की दवा खोजी है जिसकी बदौलत मलेरिया से पीडि़त रोगियों की मरने की दर में महत्वपूर्ण रूप से कमी आई है। उनकी यह खोज चीन की पारंपरिक जड़ी-बूटी वाली दवाओं पर आधारित है।