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अमेरिकी विदेश मंत्री केरी पर बरसे इस्राइली पीएम नेतन्याहू

Fri, 30 Dec 2016 04:46 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ येरुशलम
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Prime Minister Benjamin Netanyahu - फोटो : getty
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अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी द्वारा इस्राइल में विवादित स्थल पर बस्तियां बसाने की नीति की तीखी आलोचना के बाद इस्राइल के पीएम बैंजामिन नेतन्याहू ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। उन्होंने केरी के भाषण को इस्राइल विरोधी करार दिया। केरी ने इस्राइल-फलस्तीन के लिए प्रस्तावित ‘टू स्टेट’ समाधान पर कहा कि इस्राएल द्वारा अवैध बस्तियों के निर्माण पर अमेरिका चुप नहीं बैठ सकता। 
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केरी ने कहा कि - ‘पिछले कई वर्षों से हमारी अपार कोशिशों के बावजूद, टू-स्टेट प्रस्ताव अब गंभीर संकट में है। हम ऐसा नहीं कर सकते कि शांति की उम्मीद को क्षीण होते दिखने पर भी हम कुछ ना कहें।’ जर्मनी ने इसे वास्तविक शांति की दिशा में ‘टू स्टेट’ सिद्धांत के लिए कुछ करने का आह्वान बताया।

ओबामा प्रशासन का कार्यकाल खत्म होने के मात्र कुछ हफ्ते पहले आई केरी की इस टिप्पणी का काफी महत्व है। एक हफ्ते पहले ही संयुक्त राष्ट्र में इस्राइली बस्तियों में निर्माण कार्य रोकने के एक प्रस्ताव पर अमेरिका के वीटो नहीं करने से इस्राइल नाराज हुआ था। 
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अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार इस्राइल की वे बस्तियां अवैध मानी जाएंगी जो विवादित इलाके में बनाई जा रही हैं। केरी ने नेतन्याहू पर इस्राइल को लोकतंत्र से दूर ले जाने का आरोप भी लगाया। केरी के बयान के बाद नेतन्याहू ने भी कैमरे के सामने आकर ओबामा प्रशासन से अपनी नाराजगी साफ जाहिर की और साथ ही ट्रंप के साथ काम करने की इच्छा जताई।

उन्होंने अवैध बस्तियों पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया और फलस्तीन के हमलों व हिंसा भड़काने को तवज्जो न देने के लिए केरी की निंदा की। दूसरी तरफ, अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइली प्रधानमंत्री से कहा है कि इसे अनदेखा करें। ट्रंप ने ट्वीट किया कि वह 20 जनवरी तक इंतजार करें, जब वह अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे।
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केरी ने कहा इस्राइल यहूदी रहे या लोकतांत्रिक

- फोटो : getty
नेतन्याहू ने किया ट्रंप के बयान का स्वागत
नेतन्याहू ने ट्रंप के बयान का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया और उन्हें इस्राइल के साथ पारंपरिक दोस्ती निभाने व स्पष्ट समर्थन देने पर शुक्रिया अदा किया। लेकिन इससे पहले अपने अंतिम दिनों में ओबामा की तरफ से अमेरिकी विदेश मंत्री के भाषण को कुंठा से भरा माना जा रहा है। जबकि दूसरी तरफ नेतन्याहू और ट्रंप पीछे से मिले हुए दिखाई दे रहे हैं। ट्रंप द्वारा नेतन्याहू का भरोसा बढ़ाने के बाद इस्राइली पीएम काफी आशावान दिख रहे हैं।

केरी ने अपने भाषण में कहा कि अगर वह एक राष्ट्र चाहते हैं तब या तो यहूदी देश रहें अथवा लोकतांत्रिक, वह दोनों एक साथ नहीं हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने एक संभावित शांति समझौते की छह सूत्रीय रूपरेखा तैयार कर दी है जिसे आगे बढ़ाना या न बढ़ाना अगली अमेरिकी सरकार के हाथ में होगा। जबकि दूसरी तरफ ट्रंप ने इस यहूदी देश के साथ बहुत गलत व्यवहार होने पर अफसोस जताया है।

जॉन केरी के भाषण ने बढ़ाई खटास
आठ वर्षों से ओबामा के कार्यकाल में कई बार इस्राएल के साथ संबंधों को दोस्ताना दिखाने की कोशिश होती रही है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब दिखावा खत्म हो चुका है। ओबामा-नेतन्याहू संबंध भी अब तक के सबसे बुरे हाल में पहुंच चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के पहले भी दोनों देशों के बीच ईरान को लेकर कई मतभेद रह चुके हैं, लेकिन केरी के इस एक घंटे से भी लंबे भाषण में यह खटास और अधिक बढ़ गई है। 
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