अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी द्वारा इस्राइल में विवादित स्थल पर बस्तियां बसाने की नीति की तीखी आलोचना के बाद इस्राइल के पीएम बैंजामिन नेतन्याहू ने इसे बेहद निराशाजनक बताया। उन्होंने केरी के भाषण को इस्राइल विरोधी करार दिया। केरी ने इस्राइल-फलस्तीन के लिए प्रस्तावित ‘टू स्टेट’ समाधान पर कहा कि इस्राएल द्वारा अवैध बस्तियों के निर्माण पर अमेरिका चुप नहीं बैठ सकता।
केरी ने कहा कि - ‘पिछले कई वर्षों से हमारी अपार कोशिशों के बावजूद, टू-स्टेट प्रस्ताव अब गंभीर संकट में है। हम ऐसा नहीं कर सकते कि शांति की उम्मीद को क्षीण होते दिखने पर भी हम कुछ ना कहें।’ जर्मनी ने इसे वास्तविक शांति की दिशा में ‘टू स्टेट’ सिद्धांत के लिए कुछ करने का आह्वान बताया।
ओबामा प्रशासन का कार्यकाल खत्म होने के मात्र कुछ हफ्ते पहले आई केरी की इस टिप्पणी का काफी महत्व है। एक हफ्ते पहले ही संयुक्त राष्ट्र में इस्राइली बस्तियों में निर्माण कार्य रोकने के एक प्रस्ताव पर अमेरिका के वीटो नहीं करने से इस्राइल नाराज हुआ था।
अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार इस्राइल की वे बस्तियां अवैध मानी जाएंगी जो विवादित इलाके में बनाई जा रही हैं। केरी ने नेतन्याहू पर इस्राइल को लोकतंत्र से दूर ले जाने का आरोप भी लगाया। केरी के बयान के बाद नेतन्याहू ने भी कैमरे के सामने आकर ओबामा प्रशासन से अपनी नाराजगी साफ जाहिर की और साथ ही ट्रंप के साथ काम करने की इच्छा जताई।
उन्होंने अवैध बस्तियों पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया और फलस्तीन के हमलों व हिंसा भड़काने को तवज्जो न देने के लिए केरी की निंदा की। दूसरी तरफ, अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइली प्रधानमंत्री से कहा है कि इसे अनदेखा करें। ट्रंप ने ट्वीट किया कि वह 20 जनवरी तक इंतजार करें, जब वह अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे।