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हमें चीन की तरफ जाने को मजबूर न करे भारत: नेपाल

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नेपाल ने भारत से कहा है कि वह पेट्रोलियम और दूसरी जरूरी चीजों की नाकेबंदी कर इस कदर मजबूर न करे कि उसे चीन की ओर रुख करना पड़े। साथ ही पड़ोसी हिमालयी राष्ट्र ने भारत से यह भी पूछा है कि आखिर हालात पर काबू पाने में कितना वक्त लगेगा।
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इससे पहले भारत नाकेबंदी की बात को सिरे से खारिज कर नेपाल को हालात पर जल्द से जल्द काबू पाने का भरोसा दे चुका है। नेपाल में सात प्रांतीय मॉडल वाले नए संविधान का मधेसी विरोध कर रहे हैं। उन्होंने भारत से नेपाल जाने वाले अहम रास्तों की पिछले कई दिनों से नाकेबंदी कर रखी है।

भारत द्वारा नेपाल के नेतृत्व को दिए गए भरोसे पर भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा, ‘भारत को इस समस्या के हल के बारे में साफ तौर बताना चाहिए कि आखिर इसमें कितना वक्त लगेगा। मतलब घंटे, हफ्ते या फिर महीने। क्योंकि अगर हमें मजबूर किया गया तो फिर मरता क्या न करता वाली स्थिति हो जाएगी।
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फिर चाहे सामान लाने-ले जाने में हमें भले ही तमाम दिक्कतें आएं, मगर हमें मजबूरन चीन समेत दूसरे देशों से संपर्क साधना पड़ेगा।’उपाध्याय ने कहा कि नेपाल ने जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बारे में भारत को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है।

उम्मीद है कि नई दिल्ली जल्द ही इस मसले का सुलझा लेगा। क्योंकि आने वाले दिनों में दशहरा और दिवाली जैसे बडे़ त्यौहार पड़ने वाले हैं, जिन्हें इस हिमालयी राष्ट्र में काफी धूमधाम से मनाया जाता है।
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भूकंप में मदद पर नेपाल ने जताया था आभार

मधेसी आंदोलन पर नेपाल के राजदूत ने कहा कि भूकंप के वक्त जब भारत ने मदद की थी तो हरेक नेपाली नागरिक ने भारत का आभार जताया था।

मगर, अब जब कि वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो रही है तो लोग स्वाभाविक तौर पर प्रतिक्रिया देंगे ही। भारत से सोनौली सीमा और जोगबनी के रास्ते तेल के टैंकर और खाने-पीने के जरूरी सामानों को लेकर 140 ट्रक रविवार को नेपाल पहुंचे।

भारत से ट्रकों की आवाजाही शुरू हो गई है। मगर, कई प्रवेशद्वारों पर दवाएं, गैसोलिन और रसोई गैस से लदे अभी भी सैकड़ों ट्रक रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि नेपाली राजदूत ने भारत से आने वाले वाहनों की सुरक्षा का भरोसा दिया है।

दीप उपाध्याय ने भारत से कहा कि वह नेपाल सरकार की गलतियों की वजह से हुई चूक को भुला दे और ऐसा सकारात्मक कदम उठाए, ताकि दोनों देशों को फायदा पहुंचे।

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