शीर्ष अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अधिकारियों को भयभीत करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि नेपाल में विरोध प्रदर्शन को लेकर मधेसियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग करने पर नेपाली सरकार की आलोचना करने पर ओली राष्ट्रीय आयोग के अधिकारियों को डराने का प्रयास कर रहे हैं।
शुक्रवार को एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वाच और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ जूरिस्ट ने कहा कि राष्ट्रीय आयोग के अधिकारियों को धमकाना नेपाली सरकार की मानवाधिकार सुनिश्चित करने की बुनियादी बाध्यता का खुला उल्लंघन है।
दरअसल, पिछले महीने जेनेवा में यूएन मानवाधिकार परिषद के समक्ष नेपाल के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने देश में मानवाधिकारों पर चिंता जताई थी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से जारी बयान में आयुक्त मोहना अंसारी ने नेपाल के नए संविधान में भेदभावपूर्ण नागरिकता, तराई क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग एवं हत्याओं, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक उल्लंघन का जिक्र किया था।
उन्होंने पीड़ितों को विश्वसनीय न्याय दिलाने पर भी जोर दिया था। इस पर तीन अप्रैल 2016 को ओली ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन अनूप राज शर्मा और अन्य आयुक्तों को समन जारी करके बयान के संबंध में जवाब मांगा था। हालांकि ओली के विदेश मामलों के सलाहकार ने कहा कि पीएम ने सिर्फ आयोग को सावधानी से काम करने को कहा था।