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बलूचिस्तान मसले पर पाक के करीबी देश ने किया मोदी का समर्थन

Fri, 19 Aug 2016 06:52 PM IST
शशिधर पाठक/ नई दिल्ली
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हामिद करजई
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अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने बलूचिस्तान के मुद्दे पर भारत के रुख की तारीफ की है। अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बलूचिस्तान को लेकर जो कहा है, वही सच्चाई है। हम इसकी पूरी हिमायत करते हैं।
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हामिद करजई इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कॉफ्लिक्ट स्टडीज(आईपीसीएस) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए हैं।  माना जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान भी वह कश्मीर, बलूचिस्तान और अफगानिस्तान में हिंसा, उग्रवाद, आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान की खिंचाई कर सकते हैं।

करजई ने बलूचिस्तान पर बोलकर प्रधानमंत्री मोदी के रेड लाइन क्रॉस करने के आरोप पर कहा कि इसका पाकिस्तान को कोई हक नहीं है। पाकिस्तान तो हमेशा भारत और अफगानिस्तान के मामले में ऐसा करता आया है।
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वहीं बलूचिस्तान के जिक्र पर पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हम इस क्षेत्र में अमन चाहते हैं। हम वहां के लोगों के मूल अधिकार और उनके मानव अधिकार की मांग करते हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे भाई चाहे वह बलूचिस्तान, अफगानिस्तान या किसी अन्य मुल्क में हो वहां उनके परिवार का कोई बच्चा या युवा आतंकवाद, हिंसा, उग्रवाद का शिकार न हो।

करजई ने आतंकवाद के खिलाफ भारत और अफगानिस्तान का मत एक है। बलूचिस्तान में मानव अधिकारों के उल्लंघन आदि के मुद्दे पर करजई ने कहा कि हमें इसमें किसी तरह का प्रमाण देने की जरूरत नहीं है। वहां की जमीनी हकीकत और सच्चाई कुछ और है। हिंसा, उग्रवाद, आतंकवाद लगातार बढ़ रहा है।

यह पूछे जाने पर कि कहीं ऐसा तो नहीं कि भारत बलूचिस्तान को उसकी आजादी दिलाने या प्रॉक्सीवार का नया फ्रंट खोल रहा है तो हामिद करजई ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। करजई ने कहा कि वह भारत, भारत के लोगों और यहां की मानसिकता से वाकिफ हैं।

भारत कभी भी विखण्डनकारी नीति के पक्ष में नहीं रहता। प्राक्सीवॉर का कोई सवाल ही नहीं उठता। अफगानिस्तान के निर्माण में भी भारत ने अहम भूमिका निभाई है और निभा रहा है।

भारत द्वारा बलूचिस्तान का मुद्दा उठाने और इस पर पाकिस्तान को नागवार गुजरने के सवाल पर करजई ने कहा कि पाकिस्तान को चाहिए वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए विकास योजनाओं, आर्थिक प्रगति और विकास की योजनाओं पर ध्यान दे। पड़ोसी देश आतंकवाद, उग्रवाद, हिस्सा फैलाने वालों को समर्थन देना बंद करे।  
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कहा मैं शिमलाइट हूं

हामिद करजई
पाकिस्तान को किनारे रखने का भी विकल्प
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति करजई ने कहा कि यदि पाकिस्तान शांति और आर्थिक विकास के रास्ते में हमारा सहयोग नहीं करता तो उसे अलग रखकर अन्य पड़ोसी देशों के साथ मिलकर हम विकास और स्थायित्व के मॉडल पर सोच सकते हैं। हम समृद्धि बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास की योजनाओं के लिए अधिक समय तक पाकिस्तान के राजी होने का इंतजार नहीं कर सकते। अन्य विकल्प भी अपनाया  जा सकता है।

आईएसआईएस और तालिबान में संबंध नहीं
आईएसआईएस एक विदेशी आतंकी संगठन है । पुख्ता सूचनाओं को आधार बनाकर हामिद करजई ने कहा कि आईएसआईएस का आतंकी संगठन तालिबान से कोई संबंध नहीं है।  उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में अभी आईएसआईएस की कोई मौजूदगी नहीं है।

भारत का सहयोग हमारी ताकत
हामिद करजई ने कहा कि अफगानिस्तान में शांति और स्थायित्व की स्थापना के लिए वहां भारतीय सैन्य बलों की कोई जरूरत नहीं है। करजई ने कहा कि अफगानिस्तान के निर्माण में भारत सबसे बड़ा सहयोगी देश हैं। शिक्षा, प्रशिक्षण, सैन्य प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचागत विकास में इसका सबसे बड़ा योगदान है। यहां के उपकरण, साजो-सामान और सहयोग ही अफगानिस्तान की सबसे बड़ी ताकत है।


कहा मैं शिमलाइट हूं
सुनिए और चौंक जाइए। जी हां, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई अच्छी हिन्दी बोलते हैं। अमर उजाला के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि हां कोशिश करता हूं और इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति ने हिन्दी में ही कई प्रश्नों के जवाब दिया।

उन्होंने अमर उजाला का अंग्रेजी में तर्जुमा करते हुए करते हुए कहा कि अमर उजाला मीन्स नेवर इंडिंग लाइफ। करजई ने अपना एक और परिचय देते हुए कहा कि वह शिमलाइट हैं।

अफगानिस्तान के कांधार प्रांत में पैदा हुए कर्ज  पोपलजाई (दुर्रानी)कबाइली हैं। हबीबिया हाईस्कूल से स्नातक की शिक्षा के बाद एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत करजई 1976 में हिमाचल प्रदेश आ गए। शिमला विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्री संबंध में एमए किया और 1983 तक यहां रहे।
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