अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने बलूचिस्तान के मुद्दे पर भारत के रुख की तारीफ की है। अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बलूचिस्तान को लेकर जो कहा है, वही सच्चाई है। हम इसकी पूरी हिमायत करते हैं।
हामिद करजई इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कॉफ्लिक्ट स्टडीज(आईपीसीएस) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए हैं। माना जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान भी वह कश्मीर, बलूचिस्तान और अफगानिस्तान में हिंसा, उग्रवाद, आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान की खिंचाई कर सकते हैं।
करजई ने बलूचिस्तान पर बोलकर प्रधानमंत्री मोदी के रेड लाइन क्रॉस करने के आरोप पर कहा कि इसका पाकिस्तान को कोई हक नहीं है। पाकिस्तान तो हमेशा भारत और अफगानिस्तान के मामले में ऐसा करता आया है।
वहीं बलूचिस्तान के जिक्र पर पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हम इस क्षेत्र में अमन चाहते हैं। हम वहां के लोगों के मूल अधिकार और उनके मानव अधिकार की मांग करते हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे भाई चाहे वह बलूचिस्तान, अफगानिस्तान या किसी अन्य मुल्क में हो वहां उनके परिवार का कोई बच्चा या युवा आतंकवाद, हिंसा, उग्रवाद का शिकार न हो।
करजई ने आतंकवाद के खिलाफ भारत और अफगानिस्तान का मत एक है। बलूचिस्तान में मानव अधिकारों के उल्लंघन आदि के मुद्दे पर करजई ने कहा कि हमें इसमें किसी तरह का प्रमाण देने की जरूरत नहीं है। वहां की जमीनी हकीकत और सच्चाई कुछ और है। हिंसा, उग्रवाद, आतंकवाद लगातार बढ़ रहा है।
यह पूछे जाने पर कि कहीं ऐसा तो नहीं कि भारत बलूचिस्तान को उसकी आजादी दिलाने या प्रॉक्सीवार का नया फ्रंट खोल रहा है तो हामिद करजई ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। करजई ने कहा कि वह भारत, भारत के लोगों और यहां की मानसिकता से वाकिफ हैं।
भारत कभी भी विखण्डनकारी नीति के पक्ष में नहीं रहता। प्राक्सीवॉर का कोई सवाल ही नहीं उठता। अफगानिस्तान के निर्माण में भी भारत ने अहम भूमिका निभाई है और निभा रहा है।
भारत द्वारा बलूचिस्तान का मुद्दा उठाने और इस पर पाकिस्तान को नागवार गुजरने के सवाल पर करजई ने कहा कि पाकिस्तान को चाहिए वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए विकास योजनाओं, आर्थिक प्रगति और विकास की योजनाओं पर ध्यान दे। पड़ोसी देश आतंकवाद, उग्रवाद, हिस्सा फैलाने वालों को समर्थन देना बंद करे।