जानकारी के मुताबिक, गोताखोरों को गुफा का एक चक्कर पूरा करने में करीब 11 घंटे का वक्त लग रहा है। इससे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने में ज्यादा समय लग रहा है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि गुफा में फंसे अन्य बच्चों और कोच भी जल्द बाहर निकाल लिया जाएगा। मिशन में लगे एक आर्मी कमांडर ने रेस्क्यू ऑपरेशन में एक से दो दिन का वक्त लगने की भी बात कही है।
ऐसे चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
18 गोताखोरों में से 10 गोताखोर पहले चरण में अभियान को अंजाम दे रहे हैं। योजना के मुताबिक, ये गोताखोर गुफा के अंदर जा रहे हैं और वहां से दो गोताखोरों की मदद से एक बच्चे को बाहर लाया जा रहा है। हर एक बच्चे को सुरक्षित निकालने की कोशिश में दो गोताखोरों को लगाया गया है।
वाइल्ड बोर्स नामक फुटबॉल टीम के सदस्य और कोच 23 जून से संकरी और अंधेरी गुफा में फंसे हुए हैं। ये लोग अभ्यास के बाद वहां गए थे और भारी मानसूनी बारिश के चलते गुफा में पानी भर जाने से फंस गए। बच्चों की उम्र 11 से 16 साल है।
मिली अंतरराष्ट्रीय मदद
फंसे लोगों को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद भी मिल रही है। अभियान में थाईलैंड नेवी सील के 5 गोताखोर के अलावा 13 विदेशी गोताखोर भी लगाए गए हैं। साथ ही आठ देशों के विशेषज्ञ भी जुटे हुए हैं। रेस्क्यू दल में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोप एवं एशिया के कई देशों के गोताखोर भी शामिल हैं।
अब तक गुफा से 12.8 करोड़ लीटर पानी बाहर खींचा जा चुका है। पिछले कुछ दिनों से पानी खींचने में लगे इंजन 24 घंटे काम कर रहे हैं।
खतरनाक है गुफा की हालत
गुफा की लंबाई 10316 मीटर बताई जा रही है। बच्चे गुफा के द्वार से करीब 4 किलोमीटर अंदर और पहाड़ की चोटी से करीब एक किलोमीटर नीचे फंसे हैं। जहां बच्चे फंसे हुए हैं, उसके पास पानी का बहाव बहुत ज्यादा है।
गुफा के खतरनाक होने का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को सामान पहुंचाने गए एक गोताखोर की लौटते वक्त मौत हो गई।